हार के बाद आगे की सोचें

0
118

बीता रविवार भारतीय खेलों के लिए यादगार रहा। बैडमिंटन के उभरते सितारे किदांबी श्रीकांत ने इंडोनेशियाई ओपन जीता और भारतीय हॉकी टीम ने वर्ल्ड लीग के सेमीफाइनल में पुराने प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 7-1 से हरा कर टूर्नमेंट के फाइनल में प्रवेश किया।

लेकिन देश के ज्यादातर लोगों के लिए खेल का मतलब सिर्फ क्रिकेट है और चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में पाकिस्तान से मुकाबले को युद्ध जैसी शक्ल भी दी जा चुकी थी, लिहाजा इसमें मिली करारी शिकस्त ने देश में गमी का माहौल बना दिया। अच्छी बात है कि दोनों कप्तानों विराट कोहली और सरफराज अहमद ने मैच के बाद संयत बयान दिए और खेल को खेल की तरह ही लेने का आग्रह किया।

पिछले कुछ वर्षों से भारत और पाकिस्तान के बीच बड़ी गर्मागर्मी देखी जा रही है। दोनों तरफ एक-दूसरे को लेकर बहुतेरी नकारात्मक बातें कही जाती हैं। लेकिन खेल तो देशों के बीच नहीं, खिलाडिय़ों के बीच खेला जाता है। पाकिस्तानी टीम के बारे में हम जानते हैं कि वह बिल्कुल नई है। एक खिलाड़ी भी उसका ऐसा नहीं है, जिसकी दुनिया में विराट कोहली, महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह या आर. आश्विन जैसी धाक हो। दूसरी तरफ भारतीय टीम भी एक बड़े संक्रमण से गुजर रही है।

उसके खिलाडिय़ों का दिमागी ढांचा टी-2० मैचों वाला हो चला है। मैदान में सात घंटे समान एकाग्रता से बल्लेबाजी, गेंदबाजी या फील्डिंग कर सकें, ऐसी परिपच्ता सबमें नहीं है। टीम के ड्रेसिंग रूम में भी सब ठीक नहीं चल रहा। कप्तान और कोच का टकराव लगातार चर्चा में है। दुनिया की सबसे शक्तिशाली क्रिकेट संस्था बीसीसीआई भ्रष्टाचार और बदइंतजामी के आरोपों से घिरी हुई है। परस्पर विरोधी हित आपस में टकरा रहे हैं, ऊपर से उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त देखरेख समिति के साथ तालमेल भी बनाना पड़ रहा है।

चैंपियंस ट्रॉफी दो विश्व कप टूर्नमेंटों के बीच में आयोजित होती है, जहां टीमें अगले विश्व कप के लिए अपने कमजोर और ताकतवर पहलुओं की पड़ताल भी करती हैं। ऐसे में कुछ काम तत्काल कर लिए जाने चाहिए। एक तो यह कि सुप्रीम कोर्ट अब बीसीसीआई की बीमारियों का स्थायी इलाज करे, उसे अभी की ऐड हॉक स्थिति में और ज्यादा न रहने दे। दूसरे, पुराने खिलाडिय़ों की सम्मान पूर्वक विदाई की जाए और ऋषभ पंत, कुलदीप यादव जैसी नई प्रतिभाओं को टीम में अपनी जगह पक्की करने का मौका दिया जाए।

वन-डे मैचों में टी-2० की तरह थोड़ा यह भी थोड़ा वह भी कर सकने वाले खिलाडिय़ों से काम नहीं चलता। भारी तनाव वाले नॉकआउट मैच आप एक ऐंकर समेत छह पक्के बल्लेबाज, चार विकेट निकालने वाले गेंदबाज और एक इंपैक्ट ऑलराउंडर के बिना नहीं जीत पाएंगे। यह तैयारी जितनी जल्दी कर ली जाए, 2०19 के वर्ल्ड कप के लिए उतना ही अच्छा रहेगा।(आरएनएस)

LEAVE A REPLY