सवाल निष्पक्षता – विश्वसनीयता का

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विश्वनाथ सचदेव
कुछ ही दिन पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रामनाथ गोइन्का स्मृति व्याख्यान में मीडिया के दायित्व को समझाते हुए कहा था कि सूचना-क्रांति के इस दौर में सही और ग़लत के बीच फर्क करने की आवश्यकता आज पहले से कहीं अधिक है। इसीलिए ज़रूरी है कि मीडिया अपने दायित्व का पालन ईमानदारी से करे। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि हम अपने अलावा अन्य आवाज़ें सुनना बंद कर देंगे तो यह जनतंत्र के लिए घाटे की बात होगी।

राष्ट्रपति के उस व्याख्यान के बाद अब उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने प्रेस की आज़ादी पर होने वाले हमले को नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन बताया है। हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया द्वारा स्वयं अपने पर सेंसरशिप लागू करने का भी विपरीत परिणाम निकल सकता है। स्पष्ट है, उपराष्ट्रपति जनता के सूचना पाने के अधिकार की रक्षा की वकालत कर रहे थे।

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों का प्रेस की आज़ादी के बारे में इस तरह चिंता व्यक्त करना एक संयोग हो सकता है पर हकीकत यह है कि आज जिस तरह की स्थितियां देश में बन रही हैं, उनमें प्रेस की आज़ादी और प्रेस की भूमिका को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है। प्रेस को जनतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद मीडिया चौथा स्तंभ बनकर जनतंत्र की रक्षा करता है और उसे सार्थक भी बनाता है। अपेक्षा यह की जाती है कि ये चारों स्तंभ जहां अपनी-अपनी भूमिका ईमानदारी से निभायेंगे वहीं इस बात का भी ध्यान रखेंगे कि एक-दूसरे के अधिकारों का अपमान न हो, कोई एक स्तंभ दूसरे की दायित्व-पूर्ति में बाधक न बने। आदर्श स्थिति तो यह है कि एक-दूसरे की कर्तव्य-पूर्ति में सहयोगी बनें चारों स्तंभ।

राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों की चिंता के पीछे कहीं न कहीं यही बात है कि चारों स्तंभों में, विशेषकर कार्यपालिका यानी सरकार तथा खबरपालिका यानी मीडिया में एक टकराव की स्थिति जब-तब उभर आती है। इससे न केवल नागरिक के अधिकार बाधित होते हैं, बल्कि जनतंत्र की सार्थकता पर भी सवाल उठते हैं।

हमारे संविधान में मीडिया की आज़ादी नागरिक के अधिकारों के साथ ही जुड़ी है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार देता है हमारा संविधान और कार्यपालिका का कर्तव्य बनता है कि वह इस अधिकार की सुरक्षा को सुनिश्चित करे। इसका अर्थ यह है कि मीडिया पर सरकार का किसी तरह का नियंत्रण नहीं होना चाहिए। लेकिन मीडिया द्वारा अपने कर्तव्य को ईमानदारी से निभाने से कई बार सरकारों की स्थिति असहज हो जाती है और तब मीडिया उन्हें अपना विरोधी लगने लगता है। यही स्थिति उन दबावों का कारण बनती है, जो सरकारें कई-कई तरीकों से मीडिया पर डालने की कोशिश करती हैं।

हाल ही में एक समाचार चैनल पर इसी तरह का दबाव डालने की कोशिश का आरोप लगा है। एक बैंक से लिये गये ऋण की अदायगी को लेकर हुई एक निजी शिकायत पर सीबीआई की अति सक्रियता को मीडिया की स्वतंत्रता में बाधा डालने के काम की तरह देखा जा रहा है। आरोप यह है कि इस समाचार चैनल द्वारा किये गये कुछ खुलासे सरकार को रास नहीं आ रहे, इसलिए वह चैनल पर दबाव डाल रही है। चैनल ने भी स्पष्ट किया कि उसने सारा ऋण चुका दिया था और सीबीआई के माध्यम से सरकार उस पर दबाव डालना चाहती है।

सरकार का कहना है कि सीबीआई को अपना काम करने की स्वतंत्रता है और वह इस एजेंसी के कार्य में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करती। वैसे यही बात पहले की सरकारें भी कहती रही हैं और भाजपा जैसे राजनीतिक दल, जो तब विपक्ष में थे, सीबीआई की भूमिका को लेकर सरकारों पर वैसे ही आरोप लगाते रहे हैं जैसे अब विपक्ष भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर लगा रहा है।

कहा कुछ भी जाये, लेकिन यह तयशुदा बात है कि सरकारें सीबीआई जैसी एजेंसियों का अपने हितों के लिए प्रयोग करती रहती हैं और जिस तरह चैनल के मामले में इस एजेंसी ने एक निजी शिकायत पर स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई की है, उससे संदेह होना स्वाभाविक है। राष्ट्रपति का बयान तो चैनल के मालिकों पर पड़े छापों से पहले आया था, लेकिन उपराष्ट्रपति ने प्रेस की स्वतंत्रता पर हमले की बात इस घटना के बाद कही है। निश्चित रूप से कहीं न कहीं यह घटना उपराष्ट्रपति की सोच में रही होगी। इसे स्थिति की गंभीरता के रूप में समझा जाना चाहिए।

स्थिति यह है कि चैनल की गणना उन कुछ मीडिया-संस्थानों में की जाती है जो विभिन्न मुद्दों पर खरी-खरी बात कहते रहे हैं। इस संस्थान के खिलाफ होने वाली कार्रवाई को उस पर नकेल कसने की कोशिश तो कहा ही जा रहा है, शेष संस्थानों के लिए भी एक चेतावनी माना जा रहा है। यह मीडिया के लिए चिंता की बात है, लेकिन चिंता समाज को भी होनी चाहिए।

मीडिया की आज़ादी पर किसी भी प्रकार के अंकुश का मतलब नागरिक के जानने के अधिकार पर अंकुश है। नागरिक को यह जानने का अधिकार है कि शासन क्या कर रहा है, कैसे कर रहा है। मीडिया का कर्तव्य है कि वह यह जानकारी ईमानदारी से नागरिक तक पहुंचाए।

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