बाहरी डाक्टरों की भर्ती भी प्रांतीय चिकित्सा संघ को मंजूर नहीं

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मुख्य संवाददाता
देहरादून । पर्वतीय क्षेत्रों में अपने बूते स्वास्थ्य सेवायें देने में अभी तक विफल रहे चिकित्सा एंव परिवार कल्याण विभाग अब बाहरी राज्यों से 300 चिकित्सक संविदा पर रख उन्हे पहाडों में तैनात करने की अपने कदम में भी अपने ही परिवार के विरोध से जूझ रहा है ।

पिछले सप्ताह 240 चिकित्सकों के स्थानांतरण आदेश के बाद अब उसमें गंभीर समस्याओं वाले चिकित्सकों के स्थानांतरण आदेश पर पुनर्विचार को मजबूर विभाग खाली पडे 1100 चिकित्सक पदों को भरने के जतन में हैं । इसी में 300 चिकित्सक अन्य राज्यों से संविदा पर रखने और शोष में से 720 पद उत्तराखंड मेडिकल सेलेक्शन बोर्ड से भरने से भरे जाने हैं। दोनों प्रक्रियायें सोमवार से शुरू होनी है ।

लेकिन इस बीच स्थानांतरित चिकित्सकों ने अपने राजनीतिक संपर्कों के दम पर स्थानांतरण रद्द कराने को लॉबींग शाुरू कर दी है। हालांकि इस बीच महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डाक्टर डीएस रावत ने पहाड से मैदान और मैदान से पहाड स्थानांतरण को 40 और चिकित्सकों की सूची तैयार कर ली है। उनके अनुसार स्थानांतरणों और नये चिकित्सकों को भर्ती का प्रयोजन पहाड और मैदानों में स्वास्थ्य सेवाओं व विशेषज्ञ सेवाओं में संतुलन बनाये रखना है।

नये डाक्टरों की भर्ती को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है और अब अगले सप्ताह तक वित्तीय समिति सेे वेतन पेैकेज की स्वीकृति अपेक्षित है। उनके अनुसार राज्य को स्त्री रोग, हृदय रोग,काय चिकित्सा तथा शाल्यकों की अत्यधिक आवश्यकता है । विभाग में कुल मिलाकर 2700 चिकित्सक है जिनमें 1000 नियमित और शेष सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर रखे गये हैं ।

रोचक बात यह है कि विभाग प्रोविन्शियल मेडिकल हैल्थ सर्विस (पीएमएमएस) डाक्टरों के बाहरी डाक्टरों की भर्ती के खिलाफ पूर्वाग्रह के बावजूद यह प्रक्रिया गतिमान है जिसका कहना है कि सरकार उन बाहरी डाक्टरों को हम से बेहतर वेतन सुविधायें दे रही है जिन्हे स्वयं उनके राज्यों ने नकार दिया है और वे वहां की चयन प्रक्रिया में फेल हो चुके हैं ।

संगठन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार उन्होने पीएमएमएस चैन्नई से इसकी पुष्टि की है कि वहां भी चिकित्सकों की कमी है ।जाहिर है,उत्तराखंड में वहां के वही डाक्टर आएंगे जो अपने राज्य की भर्ती प्रक्रिया में छूट गये हैं । उन्ही को उत्तराखंड सरकार हम से पांच से 10 प्रतिशत ज्यादा वेतन-भत्तों पर रखेगी । हम इसे क्यों स्वीकार करेंगें ?

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