फुल्लू को ए सर्टिफिकेट नहीं मिलना चाहिए था: दिव्या

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बॉलिवुड अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने रिलीज के लिए तैयार शारिब हाशमी और ज्योति सेठी स्टारर फिल्म फुल्लू को मिले ए सर्टिफिकेट पर बात करते हुए कहा कि ऐसी फिल्में तो हमें छोटी-छोटी बच्चियों और परिवार के सदस्यों को दिखानी चाहिएं। सैनिटरी पैड, हाइजीन और इससे जुड़ी जानकारी के अभाव में आज भी तमाम महिलाएं कई तरह की बीमारियों से पीडि़त होती हैं।

दिव्या ने कहा, शारिब मेरे दोस्त हैं और उन्होंने मुझे बताया कि उनकी एक फिल्म आ रही है फुल्लू जो सैनिटरी पैड पर आधारित हैं। मुझे इस फिल्म का विषय बहुत अच्छा लगा। लोग खुलकर इस विषय में बात नहीं करते और जानकारी के अभाव में महिलाएं कई बीमारियों से पीडि़त होती हैं। इसलिए मैंने इस फिल्म को प्रमोट करने का निर्णय लिया है।

मासिक धर्म के दौरान सैनिटरी पैड और साफ-सफाई से जुड़ी बातों को महिलाओं तक पहुंचाना जरूरी है। इसे टैबू की तरह न माना जाए। आज भी अगर आप दुकान पर जाकर सैनिटरी पैड मांगते हैं, तो वह आपको ढककर देते है मानो कोई बम दे रहे हों।

दिव्या आगे कहती हैं, ऐसा ही माहौल हर घर का है। घर पर अगर आपको किसी से सैनिटरी पैड मंगवाना है, तो आप लिखकर देते हैं सीधे बोलकर नहीं मंगवाते। हमने एक साधारण हाइजीन की चीज़ को ढकने वाली बात बना दिया है। मुझे लगता है लोगों को थोड़ा समझना पड़ेगा। सैनिटरी पैड को लोगों के लिए मिलना आसान और सस्ता करने की जरूरत है। फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिला है।

लेकिन मैं चाहती थी कि फिल्म छोटी-छोटी लड़कियों को भी दिखाई जाए, परिवारों को दिखाई जाए ताकि वह यह जानकारी अपने बच्चों को दें। मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि फिल्म को ए सर्टिफिकेट किस आधार पर दिया गया है। इस फिल्म में पूरी ईमानदारी के साथ यह संदेश दिया गया है कि इन्फेक्शन से बचने के लिए सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल करना चाहिए।

फुल्लू का निर्देशन अभिषेक सक्सेना ने किया है। यह फिल्म 16 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। अभिनेता अक्षय कुमार की अगली फिल्म पैडमैन भी महिलाओं के मासिक धर्म जैसे मुद्दे को लेकर लोगों में जागरुकता फैलाने को लेकर है। पैडमैन रियल लाइफ स्टोरी पर अधारित फिल्म है।

यह कोयंबटूर के रहने वाले अरुणाचलम मुरुगनाथम की कहानी है, जिन्होंने अपने छोटे से गांव की महिलाओं के लिए लो-कॉस्ट सैनिटरी नैपकिन बनाने वाली मशीन ईजाद की थी।(आरएनएस)

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