गौरक्षकों की गुंडागर्दी

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राजस्थान के बाड़मेर में गाय ले जा रहे तमिलनाडु सरकार के कर्मचारियों पर कथित गौरक्षकों ने जिस तरह हमला किया, उससे सबकी आंखें खुल जानी चाहिए। ये गायें केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा संचालित ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ के तहत राजस्थान से तमिलनाडु ले जाई जा रही थीं। तमिलनाडु के अफसरों की टीम ने न केवल जैसलमेर के डीएम और संबंधित एसडीएम से एनओसी लिया था, बल्कि सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों से जरूरी दस्तावेज भी हासिल कर लिए थे।

जिन ट्रकों में गायें ले जाई जा रही थीं, उनमें भी साफ-साफ लिखा था ‘ऑन गवर्नमेंट ड्यूटी’। इस सबके बावजूद गौरक्षकों की भीड़ ने बाड़मेर में पुलिस थाने के 3०० मीटर के दायरे में उन ट्रकों को रोका। वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे और सीधे मार-पीट शुरू कर दी। एक ट्रक में आग लगाने की कोशिश भी हुई। अगर वे सफल हो जाते तो कम से कम 1० गायों और तीन बछड़ों की जान जानी तय थी।

आखिरकार पुलिस ने ही गौरक्षकों की इस भीड़ को काबू किया और संकट में घिरी अफसरों की इस टीम को सुरक्षित निकाला, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि मामला इस हद तक बिगड़ जाने देने में कुछ भूमिका पुलिस की भी थी। लापरवाही बरतने और समय से कार्रवाई न करने के आरोप में सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ ऐक्शन लिए जाने की सूचना है।

अभी दो महीने पहले राजस्थान में ही हरियाणा के पहलू खान को गाय खरीद कर ले जाने के आरोप में ऐसी ही भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था। उसके पास भी सारे कागजात थे। केंद्र में बीजेपी सरकार आने के बाद से राजस्थान ही नहीं, यूपी समेत विभिन्न राज्यों में गौरक्षकों ने जिस तरह का तांडव शुरू कर दिया है, वह पुलिस और सरकार के संरक्षण के बगैर संभव ही नहीं है।

दिलचस्प बात यह है कि यह समर्थन और संरक्षण कोई छुपी हुई बात भी नहीं है। जब भी ऐसी कोई घटना होती है, तरह-तरह की दलीलों के जरिए उसे जायज ठहराने की कोशिश शुरू हो जाती है। इन कोशिशों में सत्तारूढ़ पक्ष के वरिष्ठ लोग शामिल होते हैं। इस बार भी पुलिस का कहना है कि हमला करने वाले गौरक्षक नहीं, कुछ शराबी थे।

बहस गौरक्षकों के उत्पात पर होनी चाहिए, जबकि पूरा जोर इस बात पर होता है कि गाय की पवित्रता का ढोल पीटने के कौन से नए तरीके निकाले जा सकते हैं। इन सब वजहों से कथित गौरक्षकों की कारस्तानियां छिप जाती हैं। यह पहला मौका है जब इनकी गुंडागर्दी नंगे रूप में सामने आई है।

यह साफ हुआ है कि किसी को किसी भी बहाने से गुंडागर्दी की छूट देना देश के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। क्या हम उम्मीद करें कि कम से कम अब तो इसे ढकने या जायज ठहराने के प्रयास नहीं किए जाएंगे?(आरएनएस)

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