कांग्रेस में बदलाव

0
131

कांग्रेस ने अपने संगठन को मजबूत करने का फैसला किया है। मंगलवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में तय किया गया कि पार्टी के चुनाव 15 अक्टूबर तक करा लिए जाएंगे। चुनाव आयोग द्वारा अल्टिमेटम दे दिए जाने के बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बार-बार अटकते जा रहे इस काम को किसी तरह संपन्न ही कर लेने का फैसला किया है।

उन्होंने पार्टी को 2०19 के आम चुनाव के लिए तैयार होने को कहा है। हालांकि मूल सवाल अब भी अधर में है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव इस बार भी हो पाएगा या नहीं। औपचारिक तौर पर इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन कुछ ऐसे संकेत जरूर दिए गए हैं कि इस बार शायद राहुल गांधी पार्टी की कमान संभाल लें।

राहुल को लेकर पार्टी की दुविधा समझ से परे है। आखिर पार्टी किस सही वक्त का इंतजार कर रही है? शायद वह उन्हें राष्ट्रपति चुनाव के लिए अन्य विपक्षी पार्टियों से तालमेल के काम में उपयुक्त न मानती हो। कायदे से पार्टी के संगठन चुनाव पिछले साल ही संपन्न हो जाने चाहिए थे, लेकिन कांग्रेस की ओर से लगातार चुनाव आयोग से इसके लिए वक्त मांगा गया।

हारकर आयोग ने 31 दिसंबर की डेडलाइन तय कर दी। पार्टी के चरित्र और कामकाज को लेकर कांग्रेस में दो तरह के विचार हैं। सीडब्ल्यूसी की बैठक में राहुल ने पार्टी संगठन को लेकर सुझाव दिया कि इसको ग्रास रूट से जोडऩा होगा। इस पर कुछ लोगों ने दलील दी कि यह तो काडर आधारित पार्टी में हो सकता है, लेकिन कांग्रेस काडर बेस्ड नहीं, मास बेस्ड पार्टी है।

राहुल की राय है कि कांग्रेस को मास बेस्ड रहते हुए बूथ स्तर का ढांचा भी खड़ा करना होगा। उन्होंने इस संदर्भ में पंजाब के अपने अनुभव का हवाला दिया। कांग्रेस के रणनीतिकार भले ही पार्टी को मास बेस्ड समझकर अपना वक्त आने का इंतजार कर रहे हों, पर उन्हें समझना चाहिए कि आम लोगों की समस्याओं पर सक्रिय न दिखने से पार्टी तेजी से अपना मास बेस खो रही है। हालत यह है कि कई राज्यों में तो वह अतीत की वस्तु बन गई है।

एक समय था जब कांग्रेस अपने संगठनों के जरिए जनता से जुड़ी रहती थी। लेकिन अभी तो ये संगठन कहीं दिखते ही नहीं। मध्य प्रदेश के किसान आंदोलन पर ट्वीट कर रहे उसके नेता अगर किसानों के साथ खड़े होते तो पूरा दृश्य ही बदल जाता। इसी तरह कैंपस की राजनीति में उसका छात्र संगठन दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलावा और कहीं नहीं दिख रहा।

अगर कांग्रेस को अपनी जमीन वापस पानी है तो पार्टी संगठन में ऐसे लोगों को निर्णायक जगह देनी होगी, जो नई ऊर्जा के साथ काम करें और लोगों से संवाद कायम कर सकें। (आरएनएस)

LEAVE A REPLY