भारत-चीन व्यापार में चीनी वस्तुओं का दबदबा

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पिथौरागढ़। पांच साल में दोनों देशों के बीच हुआ 18 करोड़ से अधिक का कारोबार -भारतीय वस्तुओं के निर्यात की तुलना में 5 करोड़ 41 लाख से अधिक की चीनी वस्तुओं का हुआ आयात पिथौरागढ़। नरेश काण्डपाल अंतराष्ट्रीय भारत चीन- व्यापार में चीनी वस्तुओं का दबदबा है।इस व्यापार में चीनी व्यापारियों की भागीदारी लगातार कम हो रही है।

इसके बावजूद चीनी व्यापारियों का कारोबार हर साल बढ़ रहा है। पिछले पांच सालों में भारतीय वस्तुओं के निर्यात की तुलना में 5 करोड़ 41 लाख मूल्य से अधिक की चीनी सामग्री का आयात किया गया। लिपूलेख दर्रे को पार कर होने वाले भारत-चीन स्थलीय व्यापार का यह 25 वां साल है। वर्ष 1992 से शुरू हुए अंतराष्ट्रीय व्यापार में पिछले कई सालों से औसतन 2०० से अधिक भारतीय व्यापारी भाग ले रहे हैं। इस व्यापार के लिए भारतीय व्यापारियों को 5०5०मीटर ऊंचे लिपूलेख दर्रे को पार चीनी मंडी तकलाकोट पहुंचना पड़ता है।

जिसमें उन्हें 7० किमी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। तकलाकोट से भारतीय मंडी गुंजी की दूरी लगभग 42 किमी है। इसके बावजूद पिछले 14 सालों में इस अंतराष्ट्रीय व्यापार की भारतीय मंडी गुंजी में एक भी चीनी व्यापारी नहीं आया है। चीनी मंडी तकलाकोट में भी चीनी व्यापारियों की सीमित भागीदारी है। वे फिर भी भारतीय व्यापारियों से वे अच्छा कारोबार कर रहे हैं।

पिछले पांच सालों में दोनों देशों के बीच इस अंतराष्ट्रीय व्यापार में 18 करोड़, 18 लाख 64 हजार का करोबार हुआ।जिसमें 11करोड़ 79 लाख 9० हजार से अधिक की चीनी सामग्री का आयात किया गया। इसके सापेक्ष चीनी व्यापारियों ने केवल 6करोड़ 38लाख 73हजार की ही भारतीय वस्तुओं की खरीदारी की।(आरएनएस)

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