खाड़ी में संकट

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सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और इजिप्ट इन चार देशों ने अचानक जिस तरह कतर से सभी राजनयिक और यातायात संबंध समाप्त करने की घोषणा कर दी, वह संकटों से घिरे इस क्षेत्र के लिए एक और नए संकट की शुरुआत हो सकता है।

कदम को सांकेतिक न रहने देते हुए इन देशों ने जहां एक तरफ अपने नागरिकों को जल्द से जल्द वापस आने को कहा है, वहीं अपने यहां रह रहे कतरी नागरिकों को भी मुल्क छोड़ देने का अल्टिमेटम जारी कर दिया है। इन देशों ने कतर के बहुचर्चित न्यूज चैनल अल-जजीरा के प्रसारण को भी ब्लॉक कर दिया है। जवाबी कदम के तौर पर समूचे खाड़ी क्षेत्र में उड़ान सेवा देने वाली सबसे बड़ी कंपनी कतर एयरलाइंस ने सऊदी अरब की अपनी सभी उड़ानें तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दी हैं।

इन चारों देशों की नाराजगी कुछ इस्लामी समूहों को कतर की ओर से मिल रहे समर्थन को लेकर है। कतर इसका खंडन करता रहा है, लेकिन इजिप्ट और कुछ अन्य देशों में सक्रिय मुस्लिम ब्रदरहुड से उसकी करीबी जगजाहिर है। सऊदी अरब की सबसे बड़ी चिंता यही है। सुन्नी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड ज्यादातर अरब देशों में मौजूद खानदानी शासन या राजशाही का खुलकर विरोध करता है।

सऊदी अरब का शाही परिवार अभी पुरानी पीढ़ी से नई पीढ़ी को सत्ता सौंपने की प्रक्रिया में है। ऐसे में मुस्लिम ब्रदरहुड का फैलाव उसे अपने लिए कुछ ज्यादा ही खतरनाक लग रहा है। बहरहाल, आतंकवाद के कई रूपों से ग्रस्त इस क्षेत्र में सुन्नियों का आपसी टकराव पहली बार सतह पर दिख रहा है। दुनिया के बाकी देश इस टकराव में किसका किस हद तक साथ देंगे, यह अभी तय नहीं है लेकिन कतर ने झुकने का कोई संकेत नहीं दिया है।

नैचरल गैस और तेल भंडार के मामले में दुनिया में तीसरा स्थान रखने वाला यह छोटा सा देश प्रति व्यक्ति आय के मामले में पूरी दुनिया में नंबर 1 है। इसे झुकाना आसान नहीं होगा। तनाव अगर लंबा चला तो इससे दुनिया की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भारत के लिए तेल-गैस महंगी होने के अलावा एक चिंता यह भी है कि कतर की आबादी का एक चौथाई हिस्सा हिंदुस्तानी है।(आरएनएस)

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