हाईवे पर हल्ला बोल

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विधानसभा चुनाव में शर्मनाक हार के बाद प्रदेश कांग्रेस ने भले ही त्रिवेन्द्र सरकार को काम करके दिखाने के लिए छह माह का समय देने की बात कही हो लेकिन अब उसे समझ आ गया है कि अगर उसने आक्रमक विपक्ष की भूमिका नहीं निभाई तो उसकी पकड़ ढीली पड़ती जायेगी।

बीते कल एन एच 74 के निर्माण कार्य में हुए बड़े घोटाले के मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा पूरे प्रदेश में किया गया प्रदर्शन और अब 8 जून से शुरू होने वाले बजट सत्रा में इस मामले को जोर शोर से उठाने का इरादा उसकी इसी रणनीति का हिस्सा है नेता विपक्ष इंदिरा हृदयेश द्वारा बुलाई गयी विधायकों की बैठक में इस मुद्दे पर आक्रमक रूख अख्त्यार करने का निर्णय लिया गया है।

कांग्रेस ने इस बात का ऐलान कर दिया है कि वह इस मुद्दे को छोड़ने वाली नहीं है। दरअसल भाजपा नेता व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की बात करते रहे है लेकिन एन एच 74 की जांच का मामला नितिन गडकरी के पत्र के बाद जिस तरह से अधर में अटकता दिखाई दे रहा है के कारण ही विपक्ष को सरकार की घेराबंदी का मौका मिला है।

कांग्रेस की मांग है कि सरकार कुमांउ के कमिश्नर द्वारा की गयी जांच को सदन के पटल पर रखे। लेकिन अब सरकार इससे कतरा रही है। क्योंकि इस रिपोर्ट में इस बात का साफ उल्लेख है कि यह घोटाला बिना एनएच अधिकारियों की मिली भगत के संभव नहीं था।

नितिन गडकरी अब इन अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रहे है।सीधेतौर पर अब कांग्रेस इस भ्रष्टाचार के मामले में केन्द्र सरकार की संलिप्तता मान रही है राज्य सरकार सही मायने में इस मामले में फंस चुकी है और उसे जवाब देते नहीं बन रहा है।

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपने आप को संवेदनशील दर्शाने के लिए सरकार अब इसी सत्र मं लोकायुक्त और ट्रांसफर बिल को पास कराने की जुगत में है लेकिन हाईवे घोटाले की जांच से बचने का उसे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है जिसके कारण अब इस पर सियासी घमासान तय है।

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