कोरिया संकट की उलझी गुत्थी

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पुष्परंजन
गुरुवार को उत्तर कोरिया ने अमेरिका को चेतावनी दी कि इस इलाके से युद्धपोत, सैन्य तामझाम हटाये या फिर नाभिकीय हमले के लिए तैयार रहे। 3० मई को उत्तर कोरिया ने एक तस्वीर जारी की है, जिसमें उसने प्रिसेसन कंट्रोल्ड गाइड सिस्टम से लैस बैलेस्टिक राकेट के परीक्षण को दिखाया है। इस प्रणाली के ज़रिये उत्तर कोरिया ने लक्ष्य को सटीक रूप से भेदने की तकनीक हासिल कर ली है। अमेरिका की भृकुटि उत्तर कोरिया के छठे आईसीबीएम टेस्ट को लेकर तनी हुई है। ट्रंप इस टेस्ट को हर हाल में रोकना चाहते हैं।

इस हफ्ते जापान की जल सीमा में परीक्षण के दूसरे दिन मंगलवार को उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन ने जो कुछ कहा है, उससे अमेरिका के कान ज़रूर खड़े हुए हैं। किम जोंग उन ने कहा कि हम जो छठा टेस्ट करेंगे, उस अंतरमहाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइल की मार अमेरिका तक होगी। इसका मतलब यह होता है कि उत्तर कोरिया इस महत्वाकांक्षी परियोजना के कऱीब पहुंच चुका है।

फ्योंगयांग में 2०12 की परेड में दो बैलेस्टिक मिसाइलें दिखी थीं। एक थी ‘केएन-14’, जिसकी मारक क्षमता दस हज़ार किलोमीटर तक बताई गई है। दूसरी थी, ‘केएन-०8’, यह मिसाइल 11 हज़ार 5०० किलोमीटर तक प्रहार कर सकती है। मगर, इन दोनों मिसाइलों के ‘फ्लाइट टेस्ट’ बाक़ी हैं। सूचना यह है कि इनके इंजन के परीक्षण चल रहे हैं। उससे पूर्व ट्रंप के शपथ के एक माह भी पूरे नहीं हुए थे कि 14 फरवरी को ‘पुख्गुक्सोंग-2’ मिसाइल उत्तर कोरिया ने दाग दी। उस घटना के बाद बयानबाज़ी तो खू़ब हुई, पर अमेरिका कोई त्वरित कार्रवाई नहीं कर सका था।

सोमवार 2० मई को उत्तर कोरिया और जापान के बीच नये सिरे से ठन गई है। वजह बैलेस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण है। उत्तर कोरिया ने जो मिसाइल दागी है, वह शार्ट रेंज की स्कड मिसाइल है, जिसकी अधिकतम दूरी 5०० किलोमीटर होती है। तीन हफ्ते के भीतर उत्तर कोरिया का यह तीसरा मिसाइल टेस्ट था। जापान सरकार के प्रवक्ता योशिहीदे सुगा के अनुसार, मिसाइल ने जापान सागर में गिरने से पहले 4०० किलोमीटर की दूरी तय की।

मिसाइल ‘शिमाने प्रिफैक्चर’ में जापान के सुदूर ओकी द्वीप से कऱीब 3०० किलोमीटर की दूरी पर गिरी है, और इससे जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ है। जापान इससे भड़का हुआ है। प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने बयान दिया है कि हम चुप नहीं बैठेंगे, इसका जवाब देने के वास्ते अमेरिका से मिलकर काम करेंगे। शिंजो आबे ने आगे की रणनीति के लिए अपने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई है।दक्षिण कोरिया के नये राष्ट्रपति मून जे-इन ने भी अपने देश की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक इस विषय पर बुलाई है।

अमेरिकी नौसेना के ‘पैसिफिक कमांड’ की निगाहें उत्तर कोरिया की गतिविधियों पर निरंतर बनी हुई हैं। इसी कमांड ने जानकारी दी कि उत्तर कोरिया के वोसान द्वीप से मिसाइल दागी गई, जिसने लगभग चार सौ किलोमीटर की दूरी छह मिनट में तय की। यह मिसाइल सादो और ओकी द्वीप समूहों के बीच गिरी है।

यह इलाका जापान के ‘स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन’ में आता है। ताकोशोकू विश्वविद्यालय में ग्रेजुएट स्कूल के प्रोफेसर हितेशि ताकेसादा ने कहा कि अपनी मिसाइल निर्देशित करने वाली प्रणाली से उत्तर कोरिया को पता था कि वह जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र में गिरेगी।

ट्रंप तो जैसे इस इंतज़ार में थे कि उत्तर कोरिया कुछ गड़बड़ करे और उसे दबोचा जाए। उसमें उन्हें भी लपेटा जाए, जो उत्तर कोरिया के मददगार देश हैं। ट्रंप ने सबसे पहले चीन पर तंज़ कसा कि उत्तर कोरिया ने पिछली बार चीन की तरफ मिसाइल दाग कर अपने परम मित्र का अपमान कर दिया। इसके बावजूद चीन अपनी ओर से ‘पूरी कोशिश’ कर रहा है। ट्रंप ने ‘चाइना ट्राइंग हार्ड’ जैसे शब्द के ज़रिये चीन पर तंज़ किया कि आप भी उत्तर कोरिया का कुछ नहीं बिगाड़ पाये।

इसमें कोई शक नहीं कि उत्तर कोरिया चीन के बल पर उछलता रहा है। मगर, इस बार ट्रंप की कोशिश रही है कि चीन को किसी तरह घेर कर उसे उत्तर कोरिया को निपटाने में आगे किया जाए। संयुक्त राष्ट्र के ज़रिये इस दफा जिस तरह के प्रतिबंध को लगाने की बात हो रही है, उसमें पेट्रोलियम और गैस सप्लाई शामिल है।

गैस व पेट्रोल के लिए उत्तर कोरिया सबसे अधिक चीन पर आश्रित है। चीन इसके लिए कितना तैयार होगा, इस विषय को आने वाले समय पर छोडऩा होगा। यों, उत्तर कोरिया द्वारा ताज़ा प्रक्षेपास्त्र परीक्षण के चंद दिन पहले 26-27 मई को सिसली में जी-7 की बैठक हुई थी, जिसमें फ्योंगयांग से निपटने वाले एजेंडे को सबसे ऊपर रखा गया था।

शिंजो आबे उस प्रस्ताव को याद दिलाते हुए उत्तर कोरिया के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान जी-7 से करेंगे। जी-7 में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, जापान, इटली, कनाडा के अलावा यूरोपीय संघ भी शामिल है। ये देश और संगठन संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया की मुश्कें कसने में आगे रहेंगे, इसमें संदेह वाली बात नहीं है।

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