महिलाओं की भागीदारी

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यह वाकई चिंता की बात है कि महिला सशक्तीकरण के तमाम प्रयासों के बावजूद देश की कुल श्रमशक्ति में औरतों की भागीदारी कम हो रही है। वर्ल्ड बैंक ने अपनी ‘इंडिया डिवेलपमेंट रिपोर्ट’ में कहा है कि वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी के मामले में भारत काफी पीछे है। इस मामले में 131 देशों की सूची में वह 12० वें स्थान पर है। अव्वल तो नौकरियां हैं ही नहीं, और जो हैं भी, उनमें पुरुषों को प्राथमिकता दी जाती है।

श्रमशक्ति में औरतों की भागीदारी 2००5 के बाद से लगातार कम हुई है, जबकि देश में 42 फीसदी स्त्रियां ग्रैजुएट हैं। अभी महिलाओं को सबसे ज्यादा काम कृषि क्षेत्र में ही मिल पा रहा है। इंडस्ट्री और सर्विस सेक्टर में उनकी उपस्थिति महज 2० फीसदी है।

विश्व बैंक का मानना है कि मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.2 फीसदी रह सकती है, लेकिन अगर अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ा दी जाए तो जीडीपी में दहाई की वृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है। निश्चित रूप से यह हमारे लिए एक सबक है। भारत की विकास प्रक्रिया सही मायने में अपने मुकाम पर तभी पहुंचेगी, जब महिलाएं इसका अनिवार्य हिस्सा बनेंगी।

वर्कफोर्स में महिलाओं की कम मौजूदगी की सबसे बड़ी वजह लैंगिक असमानता है। हमारा सिस्टम उनके प्रति सेंसेटिव नहीं हो पाया है। हाल तक लड़कियों को शिक्षा प्राप्त करने से रोका जाता था। अब सरकार के प्रयासों से हर वर्ग की लड़कियां स्कूल-कॉलेज जाने लगी हैं, लेकिन उनमें भी ड्रॉपआउट की संख्या बहुत ज्यादा रहती है। लड़कियां अनेक कारणों से बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं। खेत में भी काम करने की आजादी सबको नहीं है।

कुछ के लिए तो यह सिर्फ एक मजबूरी है। शिक्षित स्त्रियों के एक बड़े तबके को अब भी नौकरी करने से रोका जाता है। बहुत सारी महिलाओं को करियर के बीच में ही काम छोडऩा पड़ जाता है। इसका कारण आम तौर पर प्रेग्नेंसी होती है, जिसे लेकर कंपनियों, संस्थानों के नियम-कायदे प्राय: स्त्री के अनुकूल नहीं हैं।
जाहिर है, उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाओं का शादी के बाद घर बैठ जाना बहुत बड़े स्तर पर टैलंट की बर्बादी है।

नौकरी में भेदभाव भी एक बड़ी समस्या है। एक ही काम के लिए महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कम वेतन मिलता है। सैलरी में भेदभाव के अलावा प्रमोशन में भी पक्षपात देखने को मिलता है। यही वजह है कि करियर के ऊंचे पायदानों पर उनकी संख्या कम होती जाती है। ऐसा तब है जब महिलाएं सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।

असुरक्षित माहौल और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण भी कई महिलाओं को नौकरी छोडऩी पड़ती है। महिलाओं के लिए बनी तमाम स्कीमों और कानूनों का सख्ती से पालन जरूरी है। इसके साथ ही कानून-व्यवस्था को भी चाक-चौबंद बनाया जाना चाहिए, तभी महिलाओं का वर्कफोर्स में प्रतिनिधित्व बढ़ेगा।

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