श्रद्धालुओं से लूटपाट

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चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखण्ड आने वाले श्रद्धालुओं के साथ लूटपाट, ठगी और धोखाधड़ी की जिस तरह की घटनाएं सामने आ रही है वह देव संस्कृति को शर्मशार करने वाली है। ताजा मामला केदारनाथ और बद्रीनाथ में पूजा के लिए मन्दिर समिति द्वारा काटी जाने वाली फर्जी रसीदों का है।

फर्जी रसीदें काट कर श्रद्धालुओं को लूटने का काम करने वालों को शायद यह नहीं पता है कि उनके इस अनैतिक कृत्य से उनके राज्य की छवि को कितना नुकसान हो रहा है? अभी बीते दिनों केदारनाथ में श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों द्वारा मारपीट और अभद्रता करने का मामला प्रकाश में आया था।

यही नहीं घोड़ा खच्चर वालों द्वारा यात्रियों से मनमाना किराया वसूले जाने के साथ हेली सेवा तक में कई तरह की अनियमितताएं बरती जाने और यात्रियों की जेब काटने की खबरें सुर्खियों में रही थी। यात्रा मार्गो पर इन यात्रियों से होटलों में मनमाने दाम वसूले जाने से लेकर खाने पीने की वस्तुओं तक की कई गुनी कीमतें वसूला जाना आम बात है।

यह ठीक है कि पर्यटन सीजन व्यवसाइयों के लिए कमाई का जरिया है लेकिन यात्रियों से जन सेवाओं की नौ की सौ कीमत वसूली मानसिक दिवालिया पन और लूटमार ही है।

वाहन चालकों से लेकर खाने पीने की वस्तुए बेचने वालों तक अगर हर किसी का प्रयास यह रहेगा कि जितना लूटा जा सकता है उतना लूट लो और अगर लूटपाट का विरोध् हो तो अभद्रता करो तो ऐसी स्थिति में राज्य की बदनामी तो होगी ही, साथ ही यहाँ आने वाले लोग उत्तराखण्ड की कोई अच्छी छवि लेकर वापस नहीं जायेगें।

फर्जी रसीदों के जरिए श्रद्धालुओं से लूट करने वालों का पता लगाने व उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जरूरत है जिससे उत्तराखण्ड की अतिथि देवो भवः की संस्कृति को धूमिल होने से बचाया जा सके।

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