ईवीएम की आलोचना पर रोक

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अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने वाले दलों और नेताओं को कल नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त संदेश देते हुए कहा है कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसकी साख खराब करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा ईवीएम की प्रमाणिकता के लिए किये जाने वाले प्रयासों की सराहना करते हुए इस मामले में दायर तमाम याचिकाओं के निस्तारण तक ईवीएम की आलोचना पर रोक लगा दी गयी है।

हाईकोर्ट का यह फैसला इसलिए भी स्वागत योग्य है क्योंकि इस मामले को तूल दिये जाने से लोकतंत्रा के संवैधानिक मूल्यों का हास हो रहा था तथा आम आदमी का मतदान की प्रक्रिया से विश्वास उठने का खतरा बना हुआ था। बीते समय में हुए पांच राज्यों के चुनाव में भाजपा को मिली एक तरफा जीत के बाद तमाम विपक्षी दलों द्वारा ईवीएम में गड़बड़ी व छेड़छाड़ के इस मुद्दे को अत्यध्कि तूल दिया जा रहा है।

हालांकि चुनाव आयोग द्वारा भी विपक्षी दल व नेताओं का भ्रम दूर करने की हर संभव कोशिश की गयी लेकिन चुनाव में करारी हार का सामना करने वाले कांग्रेस, सपा, बसपा और आम आदमी पार्टी के नेता अभी जिद पर अड़े हुए है आज चुनाव आयोग की चुनौती पर शक्ति परीक्षण हो रहा है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि मतदान ही लोकतंत्र की बुनियाद है और उसकी निष्पक्षता सबसे ज्यादा जरूरी है मतदान में किसी भी तरह की गड़बड़ी का मतलब लोकतंत्र से खिलवाड़ ही है लेकिन इतने गम्भीर आरोप बिना किसी ठोस सबूत के लगाये जाते है तो वह भी लोकतंत्र से भद्दा मजाक ही कहा जायेगा।

चुनाव आयोग व कोर्ट इसका सच साबित करने में जुटे है और जब तक सच सामने नहीं आता नेताओं को इसे तूल नहीं देना चाहिए लोकतंत्र की हिफाजत के लिए यह भी जरूरी है।

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