बेटियों की प्रतिभा का डंका

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सिविल सेवा परीक्षा 2016 का परिणाम उत्तराखण्ड के युवाओं की सफलता के दृष्टिकोण से बहुत खास रहा। देश की सर्वोच्च सेवाओं के लिए होने वाली इस परीक्षा में इस बार उत्तराखण्ड के युवाओं को रिकार्ड सफलता मिलना हर्ष का विषय है। इस बार उत्तराखण्ड के आठ युवाओं ने इस परीक्षा में न सिर्फ सफलता हासिल की अपितु अच्छी रैंक भी हासिल की।

भारत के हर प्रतिभाशाली छात्र का पहला सपना आईएएस बनने का होता है। प्रतिस्पर्धा का स्तर भी इतना ऊँचा होता है कि इस मंजिल को हासिल करने के लिए रात दिन कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। बहुत कम और भाग्यशाली परीक्षार्थी ऐसे होते है जो इस परीक्षा में पहले ही प्रयास में सफल हो पाते है। कर्नाटक की नन्दिनी के आर जिन्होने इस परीक्षा में सबसे अधिक अंक हासिल किये उन्हे भी यह सफलता चौथी बार में मिल सकी।

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि इस सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में लगातार तीन वर्षो बेटियां ही सर्वोच्च स्थान पर बनी हुई है। इस बार नन्दिनी के टापर रहने के साथ रैकिंग में प्रथम 25 में सात बेटियों ने अपना स्थान पक्का किया है। टापटेन में तीन बेटियों का नाम होना गर्व का विषय है। इलाहबाद की सौम्या ओवर आल में चौथे स्थान पर रही है वहीं उत्तराखण्ड अल्मोड़ा की सौम्या गुरमानी 148 वीं रैंक पर रही है। गुरमानी को यह सफलता तीसरी बार में मिल सकी। इन तमाम सफल युवाओं की जुबान पर अब बस एक ही बात है कि मजबूत इरादा और कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी है।

इस परीक्षा में देश भर से लाखों युवाओं द्वारा प्रयास किया जाता है इस बार भी अभ्यार्थियों ने रिकार्ड संख्या में भाग लिया था लेकिन सफल हुए सिर्फ 1099, जहाँ तक टापरों की बात है तो उनकी संख्या तो सीमित ही हो सकती है। खास बात यह है कि इस परीक्षा के परिणामों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अब बेटियां भी बेटों से कतई पीछे नहीं है।

प्रतिस्पर्धा के इस दौर में बेटियों द्वारा नया इतिहास लिखा जा रहा है वह पढ़ रही है और आगे बढ़ रही है। वहीं उत्तराखण्ड के युवाओं के लिए भी यह परीक्षा परिणाम उत्साह का संचार करने वाली है। अपेक्षा की जानी चाहिए कि आने वाले वर्षो में उत्तराखण्ड के युवा और बेहतर करके दिखायेंगे।

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