नर्मदा सेवा यात्रा ने रचा इतिहास

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कृष्णमोहन झा
मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री पद की बागडोर शिवराज सिंह चौहान के सक्षम हाथों में आने के बाद से राज्य के चहुंमुखी विकास और समाज के हर वर्ग की खुशहाली के लिए जो कल्याणकारी योजनाएं प्रारंभ की गई हैं उनकी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए विकास के इस अनूठे शिवराज माडल को दूसरे भाजपा शासित प्रदेशों की सरकारों के लिए अनुकरणीय बताया है

इतना ही नहीं शिवराज सरकार की कई योजनाओं को उन प्रदेशों की सरकारों ने भी अपना लिया है जहां भाजपा के इतर अन्य राजनीतिक दलों के हाथों में सत्ता की बागडोर हैं। शिवराज सिंह चौहान की विलक्षण कार्यशैली और अद्भूत नेतृत्व क्षमता तथा प्रदेश के विकास के लिए उनके जूनून से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इतने प्रभावित है कि प्रदेश के महत्वपूर्ण आयोजनों का मुख्य आतिथ्य स्वीकार करने के उनकी सहर्ष सहमति अर्जित करने में मुख्यमंत्री को तनिक भी कठिनाई नहीं होती।

प्रधानमंत्री अपनी तमाम व्यस्तताओं के बावजूद मुख्यमंत्री के आमंत्रण को न केवल सहर्ष स्वीकार कर लेते है बल्कि यहां मुख्यमंत्री की लोकप्रियता देखकर उनकी भूरि भूरि प्रशंसा करने से भी स्वयं को नहीं रोक पाते।

अभी हाल में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में 33०० किलोमीटर का सफर तय करने वाली ऐतिहासिक नर्मदा सेवा यात्रा के समापन के अवसर पर अमरकंटक में आयोजित भव्य समारोह के मुख्य अतिथि की आसंदी से अपार जनसमूह को संबोधित करते हुए जो उदगार व्यक्त किए उसका आशय यही था कि 11 दिसंबर 2०17 को पुण्य सलिला नर्मदा के उदगम स्थल अमरकंटक से प्रारंभ हुए विश्व के सबसे बड़े नदी संरक्षण अभियान को मूर्त रूप देने के लिए मुख्यमंत्री की संकल्प शक्ति एवं सेवा भावना ने उन्हें गहराई तक प्रभावित किया है।

प्रधानमंत्री ने जब यह कहा कि वे नर्मदा सेवा यात्रा में शामिल हुए लाखों नर्मदा भक्तों को प्रणाम कर स्वयं भी यात्रा का पुण्य लाभ अर्जित करने के अभिलाषी है तब निश्चित रूप से नर्मदा सेवा के उन लाखों भक्तों ने स्वयं को भाव विभोर महसूस किया होगा जो मुख्यमंत्री के आव्हान पर नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा में सहभागी बने।

प्रदेश के चहुमखी विकास और जनता की खुशहाली सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रारंभ निभिन्न योजनाओं की तरह ही नर्मदा सेवा यात्रा के रूप में इस ऐतिहासिक नदी संरक्षण अभियान की तर्ज पर दूसरे प्रदेशों में भी नदी संरक्षण अभियान प्रारंभ किए जाने की आवश्यकता जताकर अभियान प्रारंभ किए जाने की आवश्यकता जताकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दरअसल यही संदेश दिया कि मध्यप्रदेश को विकसित राज्यों की कतार में अग्रणी मानते हैं और मुख्यमंत्री पद की बागडोर शिवराज सिंह चौहान के हाथों में रहते हुए मध्यप्रदेश से यह गौरव कोई प्रदेश नहीं छीन सकता।

यह कहना गलत नहीं होगा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाहैान की विलक्षण कार्यशौली की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे जिस काम की शुरुआत करते है उसमें पूरे प्राण प्रण से जुट जाते है और फिर उस काम को परिणिति के बिन्दू तक ले जाए बिना चैन नहीं लेते। मुख्यमंत्री की इसी खुबी ने उन्हें सारे प्रदेश में अपार लोकप्रियता का हकदार बनाया है लेकिन खुद को प्रदेश की जनता का विनम्र सेवक मानने वाले शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार के किसी भी अभियान की सफलता का श्रेय खुद लेने की लालसा या महत्वाकांक्षा से सदैव परहेज किया है।

वे सरकार के हर अभियान की सफलता का श्रेय प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता को देते हैं यहीं कारण है कि मुख्यमंत्री की पहल पर प्रारंभ राज्य सरकार का हर अभियान एक जन आंदोलन का रूप ले लेता है जिसमें प्रदेश की जनता तन मन से अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आतुर हो उठती है और सरकार का जो अभियान एक जन आंदोलन का रूप ले ले उसकी सफलता में सेदह की तो रंच मात्र गुजायश भी नहीं रह जाती।

गत वर्ष 11 दिसंबर को अमरकंटक से प्रारंभ हुई नर्मदा सेवा यात्रा आज जब एक ऐतिहासिक जनआंदोलन का रूप ले चुकी है तब इसमें समाज के हर तबके की संपूर्ण भागीदारी ने न केवल इस अभियान की सफलता सुनिश्चित कर दी है बल्कि इस अभियान की ख्याति को प्रदेश की सीमाओंं के बाहर सारे देश और विदेशों तक पहुंचा दिया है।

मध्यप्रदेश की जीवन रेखा मानी जाने वाली पुण्य सलिला नर्मदा सेवा यात्रा के माध्यम से प्रदेश की जनता तक यह संदेश पहुंचाने में मुख्यमंत्री चौहान शत प्रतिशत सफल हुए है कि मां नर्मदा की विशेष धार्मिक अवसरों पर पूजा अर्चना ही अपने कर्तव्य की इतिश्री नहीं है बल्कि इसके संरक्षण एवं इसे हमेशा प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए निरंतर सक्रिय रहना होाग।

आस्था एवं श्रद्धा की प्रतीक पुण्य सलिला नर्मदा के संरक्षण हेतु प्रारंभ इस पावन यज्ञ में मुख्यमंत्री ने अगर स्वयं पहली आहुति देकर खुद को धन्य माना है तो सारे प्रदेश की जनता भी इस यज्ञ में अपनी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ऐसा अपूर्व उत्साह प्रदर्शित कर रही है जो दूसरे प्रदेशों की सरकारों के लिए भी प्रेरणा का विषय बन चुका है।

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