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हमारे संवाददाता
देहरादून। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर शराब का धंधा करने और घटिया शराब बेचने का आरोप लगाने वाली भाजपा ने भी सत्ता में आते ही पहाड़वासियों को शराब के जरिए निचौड़ने का मन बना लिया है।

भले ही सत्ता शीर्ष पर बैठे नेता सूबे में शराब की बिक्री को हतोत्साहित करने का दिखावा कर रहे हों और 9 जिलों में शराब की बिक्री के घंटे घटा कर 12 से 6 कर दिये हों लेकिन सरकार के इस निर्णय से शराब की न सिर्फ मारामारी बढ़ रही है अपितु शराब की तस्करी में भी भारी इजाफा हो रहा है। शराब के शौकीनों को ठेकों पर किसी भी ब्रांड की शराब न सिर्फ बेची जा रही है अपितु उनसे मनमानी कीमत भी वसूली जा रही है।

विपक्ष में रहते हुए भाजपा नेताओं द्वारा हरीश रावत सरकार के लोगों को डेनियल ब्रांड की घटिया शराब पिलाने और शराब से मनमानी कमाई के आरोप लगाये जाते रहे है। लेकिन वर्तमान समय में पहाड़ी जनपदों में किस-किस ब्रांड की शराब बेची जा रही है इसका सरकार को भी पता नहीं है। राजधानी दून के अलावा अच्छी व रेग्यूलर ब्रांड की शराब कहीं भी उपलब्ध् नहीं है।

बागेश्वर के एक ठेके पर इसकी रियलिटी चेकिंग में पता चला कि यहाँ सिर्फ मैक डोनल रम के अलावा कोई ब्रांडेड शराब उपलब्ध् नहीं है। ठेके पर सड़क की तरफ की खिड़की बंद कर बैक साइड की खिड़की से शराब की बिक्री की जा रही है। मैक डोनल रम जिसकी बाजार कीमत 395 रूपये है 500 रूपये बोतल बेची जा रही है। यानि एक बोतल पर सौ रूपये से भी ज्यादा की ब्लैकमैलिंग।

सरकार इस बात से खुश है कि उसने अपनी नई शराब नीति में एक्ससाइज व अधिभार ड्यूटी के साथ दो प्रतिशत सेस वसूली का प्रावधान कर लोगों से 15 प्रतिशत अध्कि राजस्व वसूली का इंतजाम कर लिया है। शराब ठेकों से आय तय कर दी है। दुकानों की नीलामी से 1484 करोड़ का लक्ष्य रखा है तथा साल भर में 17 सौ करोड़ की जगह 21 सौ करोड़ कमाने का मंसूबा भी साफ है लेकिन अच्छी ब्रांड व रेट लिस्ट दुरस्त नहीं है।

रेट लिस्ट पर होलोंग्राम चिपका कर मनमानी वसूली हो रही है। ग्राहक इस रेट लिस्ट को पढ़ भी नहीं सकते है।

ठेका खुलने का समय कम करने से भीड़ बढ़ी है जिसका फायदा ठेके वाले उठा रहे है। तस्करों की पौ बारह है कल दून में 90 पेटी के साथ दो पकड़े गये तो आज हरिद्वार में 14 पेटी के साथ एक तस्कर गिरफ्तार किया गया। शराब की कमाई और धंधे में भाजपा सरकार किसी भी सूरत में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार से पीछे नहीं दिख रही है।

उसने भी शराब के शौकीनों को तबियत से निचौड़ने का मन बना लिया है। सूबे की महिलाएं भले ही दिन रात शराब बंदी के लिए आंदोलन कर रही हों लेकिन सरकार तो सरकार है उसे मनमानी से भला कौन रोक सकता है।

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