बोर्ड परीक्षा परिणाम

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बीते कल उत्तराखण्ड बोर्ड परीक्षा का जो परिणाम आया है वह पिछले साल की तुलना में थोड़ा बेहतर जरूर है लेकिन इसे उत्साह जनक नहीं कहा जा सकता है। हमेशा की तरह इस बार भी छात्रों के मुकाबले छात्राओं ने बेहतर करके दिखाया है जो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं के लिहाज से एक अच्छा संदेश देता है।

हाईस्कूल की परीक्षा को शिक्षा के लिए पहली नींव की ईंट माना जाता है और यहीं से किसी भी छात्र-छात्रा के भविष्य के सपनों की उड़ान शुरू होती है। जो भी छात्रा इस परीक्षा में कुछ बेहतर करके दिखा पाते है उनके मन में एक नई उर्जा का संचार लाजमी तौर पर होता है और अगर वह इसे बनाये रख पाते है तो वह निश्चित ही सफलता के उस मुकाम तक पहुंच जाते है जहाँ वह जाना चाहते है।

कई बार कुछ छात्र छात्राओं से कुछ चूक भी हो जाती है जो उनकी असफलता का कारण बन जाती है। ऐसे असफल युवाओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि असफलता से बड़ा सफलता का कोई दूसरा रहस्य नहीं होता है। किसी भी असफलता के बाद अगर कोई बड़ी सफलता हासिल की जाती है तो उसका महत्व व खुशी बहुत ज्यादा होती है। कई बार हम अपनी असफलता के भाग्य और अपनी परिस्थितियों को जिम्मेवार ठहरा देते है।

जो हमारे कमजोर हौसले और नकारापन को दर्शाता है। पानी के प्रवाह के विपरीत तैरने वाले को ही तैराक कहते है। दून की रिया, मुस्कान, अलीशा, आरशी व शैली इसकी मिसाल है। किसी के पिता मजदूरी करते है तो किसी के पिता रेहड़ी लगाते है या सेल्समैन है या मां बल्ब फैक्ट्री में काम करती है लेकिन इन छात्राओं ने विषम आर्थिक परिस्थितियों में भी न सिर्फ परीक्षा उत्तीर्ण की बल्कि अपनी मेहनत व लगन का लोहा मनवाया है।

खुद को बुलन्द करना भले ही आसान न सही, लेकिन जिन्दगी में असंभव तो कुछ नहीं होता। हर सफलता के लिए सिर्फ बुलन्द हौसला चाहिए होता है। जो सफल रहे उन्हे बधाई और जो असफल रहे उन्हे उज्जवल भविष्य की शुभ कामनाएं।

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