नगर निगम को मुंह चिढ़ा रहे गांधी पार्क में टूटे झूले

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नगर संवाददाता
देहरादून। गांधी पार्क में बच्चे छुट्टियों में भी झूलों का लुत्फ नहीं उठा पा रहे हैं। पिछले कई वर्षों से पार्क के सौंदर्यीकरण के दावे हो रहे हैं लेकिन काम शुरू होने का नाम ही नहीं ले रहा है।

गांधी पार्क में एक तरफ के हिस्से में बच्चों के लिए पार्क बनाया गया था। इस पार्क में बच्चों के झूलने के लिए झूले भी लगाये गये थे जहां सुबह-शाम बच्चों की भीड़ लगी रहती थी। यहां तक की कुछ झूले टूट गये थे लेकिन फिर भी बच्चों का झूला झूलने का मोह नहीं छूट रहा था। इन बच्चों में जहां गांधी पार्क में सैर करने वालों के बच्चे शामिल होते थे वहीं आसपास घूमने, भीख मांगने वाले बच्चों का जमावड़ा भी यहां पर लगा रहता था।

सर्दी-गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के लिए यह पार्क सबसे नजदीकी और घूमने के लिए बेहतर होता है लेकिन अब यहां पर झूले न होने कारण बच्चों को मायूस हो कर लौटना पड़ रहा है। पार्क के आसपास के क्षेत्र में रहने वाले बच्चों के लिए यह पार्क भी अब केवल घूमने के लिए ही रह गया है।

वैसे तो पार्क के सौंदर्यीकरण के लिए काम लम्बे समय से हो रहा है लेकिन विगत वर्ष यहां बच्चों के लिए लगे झूलों को हटा कर नये झूले लगाने और बच्चों के पार्क का सौंदर्यीकरण करने का दावा किया गया था। झूलों को तोड़ने के बाद बच्चों के लिए दुबारा झूले लगाने की जहमत तक नगर निगम ने अब तक नहीं उठायी है। महापौर भी केवल दावों तक सिमट कर रह गये हैं। वैसे तो पार्क में इतनी जगह है कि कहीं पर भी बच्चों के लिए झूले लगाये जा सकते हैं लेकिन लगता है कि नगर निगम बच्चों की खुशी के लिए कोई सिरदर्दी नहीं लेना चाहता है।

पार्क में झूले निकाल कर एक तरफ फेंके हुए। जिस जगह पर झूले लगे हुए थे वहां पर निर्माण सामग्री पफैली हुई है। अब यहां पर बच्चे आते हैं तो इन टूटे हुए झूलों को देख कर मायूस हो जाते हैं। कुछ बच्चे तो फिर भी इन टूटे हुए झूलों पर ही झूल कर अपना मन बहला लेते हैं। वैसे भी महापौर तो अब विधायक भी बन गये हैं और उनका मेयर का कार्यकाल भी बहुत समय का नहीं रह गया है जिसकी वजह से वे तो अब शायद ही इस ओर कोई ध्यान दे पायें।

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