कोयले की आंच

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बहुचर्चित कोयला घोटाले से जुड़े एक मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने सोमवार को पूर्व कोयला सचिव एचसी गुप्ता और दो अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को दो साल जेल और एक-एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। तीनों सरकारी अधिकारियों के अलावा एक निजी फर्म कमल स्पंज स्टील ऐंड पावर लिमिटेड पर एक करोड़ रुपये जुर्माना लगाया गया है और फर्म के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन कुमार अहलूवालिया को तीन साल जेल तथा 3० लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

यह सजा विशेष सीबीआई अदालत से मिली है और बचाव पक्ष के पास ऊपरी अदालतों में अपील करने का विकल्प उपलब्ध है, मगर एक समय देश की राजनीति को हिला कर रख देने वाले इस घोटाले में यह फैसला खासा अहमियत रखता है।

इस मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम भी उछला था। आरोपियों का कहना था कि खदान आवंटन के वक्त कोयला मंत्री की जिम्मेदारी भी प्रधानमंत्री ही निभा रहे थे, इसलिए उन्हें भी आरोपी के रूप में शामिल किया जाए। मगर, सीबीआई अपनी खोजबीन से इसी नतीजे पर पहुंची कि संबंधित मामले में कोयला सचिव ने प्रधानमंत्री को अंधेरे में रखा था।

ऐसे घोटालों में आम तौर पर राजनीति इस कदर छा जाती है कि बाकी पहलू उपेक्षित रह जाते हैं। खासकर नौकरशाही और निजी व्यवसायी घोटालों का फायदा तो सबसे अधिक उठाते हैं, लेकिन सिस्टम के हाथ इन तक पहुंचें, इसके पहले ही ये काफी दूर जा चुके होते हैं। यह मामला इस लिहाज से अहम है कि न केवल नौकरशाही की सबसे ऊंची पायदान पर बैठे अफसर बल्कि निजी व्यवसायी भी सजा के दायरे में लाए गए। निजी व्यवसायी को तो अधिकारियों से भी ज्यादा सख्त सजा दी गई। ऑफिसरों को दो साल की जेल तो व्यवसायी को तीन साल की।

ऑफिसरों को एक-एक लाख जुर्माना तो व्यवसायी को तीस लाख। देखना होगा कि कोयला घोटाले से जुड़े अन्य मामलों में न्याय प्रक्रिया कैसा रूप लेती है, लेकिन इतना तो है ही कि इस मामले में अदालत ने अपराध की गंभीरता के हिसाब से सजा सुना कर सभी संबंधित पक्षों को कड़ा संदेश दिया है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस फैसले के बाद सरकारी संसाधनों से जुड़े सभी घोटालेबाजों में खौफ पैदा होगा।(आरएनएस)

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