स्वच्छ ऊर्जा वक्त की जरूरत

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विकसित देशों की ना-नुकुर और चीन समेत कुछ देशों द्वारा एनएसजी की सदस्यता के रास्ते में रोड़े अटकाये जाने के बाद भारत ने अपनी राह चुन ली है। पोखरण परीक्षण की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की मीटिंग में देश में दस स्वदेशी दाबानुकूलित भारी जल परमाणु रियक्टरों के निर्माण को मंजूरी दे दी गई।

फैसले का मकसद जहां रूस समेत विकसित देशों पर दबाव बनाना है, वहीं स्वच्छ ऊर्जा, मेक इन इंडिया मिशन की पूर्ति और भारतीय तकनीक की स्थापना भी है। इसका लक्ष्य मौजूदा परमाणु ऊर्जा से निर्मित बिजली की उत्पादन क्षमता को तीन गुना करना है। सरकार इस परियोजना से कई लक्ष्य साध रही है। एक तो इससे 7० हजार करोड़ रुपये के विनिर्माण ऑर्डर मिलने की उम्मीद है, वहीं भारत को परमाणु उद्योग उच्च प्रौद्योगिकी के साथ स्वदेशी औद्योगिक क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी।

अनुमान है कि इससे तैंतीस हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। दूसरी तरफ भारत ने जलवायु परिवर्तन रोकने के पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। इसके तहत भारत को तीस फीसदी कार्बन उत्सर्जन में कटौती करनी है। इस लक्ष्य को हासिल करने में परमाणु ऊर्जा सहायक साबित हो सकती है। वैसे भी पिछले चार दशक में भारी जल रियक्टर निर्माण में भारत का रिकॉर्ड विश्वस्तरीय रहा है।

दरअसल, सरकार के फैसले का मकसद चीन व पाक के करीब आ रहे रूस पर दबाव बनानाभी है।रूस द्वारा चीन के वन बेल्ट, वन रूट महत्वाकांक्षी कार्यक्रम में भागीदारी और पाकिस्तान के साथ सामरिक साझेदारी भारत की चिंताओं में शामिल है।अमेरिका से बढ़ती नजदीकी और डोनाल्ड ट्रंप की अविश्वसनीय कूटनीति के बीच भारत पुराने भरोसेमंद साथी के रूप में रूस की तरफ देख रहा है जो भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में सक्रिय भागीदार रहा है।

कहीं न कहीं अगले माह नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के बीच होने वाली बैठक में भारत के फैसले का दबाव रहेगा। जहां तक रूस के साथ कुडनकुलम परमाणु रियक्टर विकसित करने हेतु एमओयू साइन करने का प्रश्न है तो भारत ने जता दिया है कि यदि शीघ्र भारत को एनएसजी का सदस्य नहीं बनाया गया तो भारत के पास स्वदेशी रियक्टर विकसित करने का ही विकल्प शेष रहेगा।

आर्थिक संकट से गुजर रहे रूस के लिये नये रियक्टर लगाने के समझौते प्राणवायु जैसे साबित हो सकते हैं। मौजूदा परिदृश्य में व्यावसायिक रिश्ते ही कालांतर सामरिक रिश्तों की बुनियाद तय करते हैं। तेजी से विकसित होते देश की ऊर्जा जरूरतों के चलते भारत सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2०24 तक परमाणु ऊर्जा का उत्पादन तीन गुना कर दिया जाये।(आरएनएस)

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