खटारा वाहन, तेज रफ्तार

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चारधाम यात्रियों की जान पर भारी

हमारे संवाददाता।
उत्तरकाशी/देहरादून। बीते कल उत्तरकाशी के नालूपानी में हुए सड़क हादसे में लापता और घायल यात्रियों की खोज के लिए आज दूसरे दिन भी बचाव राहत कार्य में लगे सुरक्षा दलों द्वारा सर्च अभियान चलाया गया। मगर उन्हे दोपहर दो बजे तक कोई कामयाबी नहीं मिल सकी। बीते कल सांय छह बजे 30 चारधाम यात्रियों से भरी मिनी बस के गंगा में गिरने के बाद 22 यात्रियों के शव व छह घायलों को बाहर निकाल लिया गया था शेष तीन यात्रियों का कहीं पता नहीं चल सका था।

इस भीषण हादसे के बाद भले ही सीएम द्वारा दुर्घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिये गये है लेकिन इस दुर्घटना ने सरकार के सुगम व सुरक्षित चारधम यात्रा के दावे पर भी सवाल खड़े कर दिये है। जिन टूर व ट्रैवल ऐजेंसियों के खटारा वाहनों के दम पर सरकार यह दावें कर रही है वह चारधाम यात्रियों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही है।

प्रशासन के पास न तो वाहनों की फिटनैस की जांच की जा रही है न चालकों के अनुभव की। आरटीओं का कोई भी अधिकारी इन वाहनों की पिफटनैस को लेकर फ़िक्रमंद नहीं है। 10-15 साल पुराने वाहन जिनके टायर तक पूरी तरह घिसे हुए है चारधाम यात्रा मार्गो पर दौड़ रहे है और उन्हे कोई रोकने टोकने वाला नहीं है।

न ही इनकी रफ्तार पर कोई प्रतिबन्ध् है कल जिस नालूपानी में यह भीषण हादसा हुआ वह डेंजर जोन में आता है। सड़क तो खस्ता हाल है ही, साथ ही तीन साढ़े तीन सौ फिट गहरी खाई के साथ गंगा बह रही है लेकिन सड़क किनारे रैलिंग जैसी भी कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं है।

वाहन स्वामियों व टूर टै्रवल कम्पनियों को सिर्फ अपनी कमाई से सरोकार है यात्रियों की सुरक्षा से उनका कोई लेना देना नहीं है। यात्रियों के भारी दबाव के बीच जल्दी से जल्दी अपना चक्कर पूरा करने के लिए इन वाहन चालकों द्वारा रफ्रतार पर भी कोई नियंत्रण नहीं रखा जाता है जिनकी तेज रफ्तार यात्रियों की जान पर भारी पड़ रही है।

वाहनों की कमी और यात्रियों की परेशानी को हल करने के लिए प्रशासन द्वारा स्कूलों की बसों को हायर किया जा रहा है। यहां तक कि दून में चलने वाली खटारा सिटी बसें भी चारधाम यात्रियों को ढोने में लगाई जा रही हैं। यह सहज सोचा जा सकता है कि इन बसों के ड्राईवर पहाड़ों की सर्पीली मोड़ वाली सड़कों पर वाहन चलाने के लिए कितने उपयुक्त हो सकते हैं।

इन अनाड़ी ड्राइवरों के हाथों में इन यात्रियों की जान कितनी सुरक्षित हो सकती है। और तो और जिन 13 हेली कंपनियों के हेलीकॉप्टर चारधाम यात्रा करा रहे हैं वह 15 से 20 साल तक पुराने हैं। पिछले दिनों केदारनाथ में एक हेलीकॉप्टर से निकली चिंगारियों के कारण उसमें सवार यात्रियों को बामुश्किल बचाया जा सका था।

नालूपानी हादसा शासन-प्रशासन के लिए खतरे का एक अलार्म है। अगर अब भी उसकी नींद नहीं टूटती है और खटार वाहनों को यात्रा से बाहर नहीं किया जाता है व वाहनों की रफ्तार पर लगाम नहीं लगाई जाती है तो इस तरह की दुर्घटनाओं को रोका नहीं जा सकेगा।

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