साइबर हमलों से त्रस्त दुनिया

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दुनिया में फिरौती के नये साइबर हमलों और नयी करेंसी का खौफ है। गिरोहों के सरगना फिरौती वायरस का प्रयोग कर रहे हैं। बंधक बनाए गए नेटवर्क डाटा के लिए मांग की जा रही है बिटकॉयन की। बिटकॉयन, जो दुनिया के किसी भी देश की अधिकृत मुद्रा न होने के बावजूद डिजिटल जगत में चलन में है और अमेरिकी डालर से 3०० गुना ज्यादा कीमती है।

पहले विकसित देशों से ही वायरस हमलों की खबर थी, किंतु 48 घंटों के भीतर ही फिरौती वायरस का खौफ भारतीय सरकारी और कारोबारी जगत पर भी नजर आया। तमाम कंप्यूटर नेटवर्क रैनसमवेयर की आशंका में ऑनलाइन नहीं हुए। पर्यटकों को बैंकों के एटीएम से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

बैंक अपने कंप्यूटर सिस्टम की किलेबंदी में लगे हैं। दरअसल यह माफिया तमाम निगरानियों से मुक्त हो सीधे कंप्यूटर नेटवर्कों पर कब्जा कर लेता है, फिरौती मांगता है। देश-दुनिया की तमाम इंटेलीजेंस एजेंसियां और जासूसी तंत्र माफिया के नये अवतार के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। हर कोई अपने बैंक एकाउंट चेक करने के लिए भी खाते को ऑनलाइन खोलकर देखने से डर रहा है।

साइबर जगत शुक्रवार को सबसे बड़े साइबर हमले के लिए तैयार नहीं था। दरअसल, कंप्यूटर की भाषा में मालवेयर के जरिए हमला करने वाले नये ढंग के माफिया ने लोगों के कंप्यूटर सिस्टम को लॉक कर दिया और खोलने के लिए फिरौती मांगी। साइबर हमलावरों ने बिटकॉइन्स में हर शिकार से औसतन 3०० डॉलर की फिरौती की मांग की। इस नये हमले को नाम दिया गया रैनसमवेयर वानाक्राइ और वानाक्रिप्ट का।

चर्चा है कि इस अटैक को अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी से चोरी किए गए ‘साइबर हथियारों’ की मदद से अंजाम दिया गया। दुनिया का कोई भी तंत्र इस रैनसमवेयर हमले को रोकने के लिए तैयार नहीं था। दो दिन बाद इस हमले को लगाम लगाई भी तो 22 साल के एक साइबर एक्सपर्ट मलवेयरटेकब्लाक नाम के ट्विटर हैंडिल चलाने वाले अनाम से शख्स ने।

महज 1०.69 डॉलर खर्च करके रैनसमवेयर में इस्तेमाल होने वाले डोमेन नेम को रजिस्ट्रेशन करने के बाद इसका प्रसार रुक गया। जब तक यह अटैक रोका गया, 74 देशों के हजारों कंप्यूटर इसकी चपेट में आ चुके थे।

इस रिसर्चर ने यह भी दावा किया कि लोगों को ऐसे हमलों से बचने के लिए अपने सिस्टम जल्द से जल्द अपडेट कर लेने चाहिए। वायरस हमले के बाद हड़बड़ी में कंप्यूटरों की ओवरहालिंग का ही नतीजा है बैंकों के एटीएम ठप होना और आम जनता का कंप्यूटर आधारित तंत्र के प्रति विश्वास डगमगा जाना।

सरकारों को सबसे पहले साइबर तंत्र को सेंधमारी से मुक्त करने का अभियान चलाना होगा।(आरएनएस)

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