बंधक बने कंप्यूटर

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कंप्यूटर वायरस वन्नाक्राई के हमले को अब तक का सबसे बड़ा साइबर अटैक कहा जा रहा है। इसके लिए रैन्समवेयर शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी यह आपके कंप्यूटर में मौजूद सामग्री को बंधक बना लेगा और पैसे देने के बाद ही यह आपके काम लायक हो पाएगी, या शायद तब भी नहीं।

दुनिया भर में सॉफ्टवेयर इन्वाइरनमेंट का जैसा बंटवारा हो रखा है और बड़ी-बड़ी कंपनियां इसमें जैसे खेल कर रही हैं, रैन्समवेयर भी उन्हीं से प्रेरणा लेते रहे हैं। वन्नाक्राई को दुनियाभर में मौजूद आउटडेटेड ऑपरेटिंग सिस्टम्स से भरपूर ऊर्जा मिल रही है लेकिन इस वायरस की सफलता का जो असली राज है, वह यह कि हम अपने ईमेल पढ़ते वक्त पूरी सावधानी नहीं बरतते और अपना कंप्यूटर या मोबाइल वक्त-वक्त पर अपडेट नहीं करते।

इंटरनेट प्रयोग करने वालों की यह ग्लोबल गंदी आदत है। इसी के चलते यह वायरस दुनिया के अस्सी से भी ज्यादा देशों में फैल चुका है। ब्रिटेन की स्वास्थ्य व्यवस्था का पूरा ढांचा हिल गया है। रूस कह रहा है कि उसने अपना बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित कर लिया है लेकिन यह असल में कितना हो पाया है, खुद रूसियों को भी नहीं पता।

जापान से लेकर रोमानिया और स्पेन तक के कंप्यूटर्स को अपने कब्जे में लेने वाले इस वायरस के बारे में जो सबसे खतरनाक बात सामने आई है वह यह कि कभी अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी एनएसए ने इस वायरस को इंटरनल ब्लू के नाम से बनाया था।

बाद में शैडो ब्रोकर्स नाम के एक ग्रुप ने इसे चुराकर लीक कर दिया लेकिन एनएसए ने यह बात साइबर हमलों से निपटने में लगे दूसरे लोगों को नहीं बताई। भारत में अभी तक इससे काफी कम नुकसान हुआ है लेकिन जिस तरह से देश में सबसे ज्यादा आउटडेटेड मशीनें और सॉफ्टवेयर निरंतर प्रयोग हैं, उसे देखते हुए यहां हमले की आशंका ब्रिटेन और जापान से भी कहीं ज्यादा है।

हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या विंडोज एक्सपी की मशीनें साबित होने वाली हैं, जो बैंकिंग से लेकर लगभग हर क्षेत्र में प्रयोग हो रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने इसे अपडेट करना बंद कर दिया है लेकिन इसी साल मार्च में इसके अपडेट का एक पैक जारी किया था।

ताजा जानकारी के मुताबिक हैकरों ने उसे भी तोड़ दिया है। इधर बैंकिंग सिस्टम पर जैसे हमले हुए हैं, उसे देखते हुए सारी मशीनों के अपडेट हुए बगैर इससे बचे रहना संयोग ही होगा।(आरएनएस)

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