व्यापारियों में बेचैनी

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फिर बोतल से बाहर आया चकराता रिडवलपमैंट का जिन्न

हमारे संवाददाता
देहरादून। चार साल बाद एक बार फिर चकराता रोड रि-डवलपमैंट का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। जिसके कारण स्थानीय लोगों और व्यापारियों में हड़कम्प का माहौल है। कई तरह की आंशकाओं से घिरे लोगों को अब भाजपा सरकार से राहत की आस है।

तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यकाल में चर्चाओं के केन्द्र में आये चकराता रोड रिडवलपमैंट प्लान के विरोध् में व्यापारियों की सोशल अपील को खारिज किये जाने के बाद अब एमडीडीए द्वारा पुनः इस पर काम किये जाने की तैयारी की जा रही है।

हालाँकि एमडीडीए द्वारा 2013 में ही इसका खाका तैयार कर लिया गया था लेकिन व्यापारियों के अदालत की शरण में चले जाने के बाद यह मामला लम्बित पड़ा था। घंटाघर से लेकर प्रभात सिनेमा तक चकराता रोड के दोनों ओर इस प्लान के अनुरूप बहुमंजली काम्पलेक्स बनाये जाने की इस बड़ी योजना को लेकर जहाँ एमडीडीए व प्रशासन उत्साहित है और शहर की सूरत बदलने की बात कर रहा है

वहीं जिन लोगों की जमीन पर यह इमारत बनायी जानी है वह कई तरह की आशंका जता रहे है उनका मानना है कि रिडवलपमैंट की आड़ में उनकी दुकान व मकान उजाड़ा जा रहा है। वह क्या करेंगे और कहाँ रहेगें? इसे लेकर वह चिंतित व परेशान है।

हालांकि हाईकोर्ट द्वारा इसे नजूल की भूमि मानते हुए इस पर सरकार के हक की बात कही गयी है लेकिन सैंकड़ों साल से इस भूमि पर काबिज लोगों का पुर्नवास व प्लान पूरा होने पर उन्हे उतने ही वर्गमीटर भवन जितनी उनकी जमीन है देने की व्यवस्था की गयी है लेकिन प्लान को पूरा होने में लम्बा समय लगेगा जिसके कारण स्थानीय लोग परेशान है।

अदालत से राहत न मिलने पर अब यह स्थानीय लोग और व्यापारी सूबे की नई भाजपा सरकार से यह उम्मीद लगाये बैठे है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस द्वारा बोई गी इस फसल को काटने में उन्हे कुछ राहत दी जाये। उनका कहना है कि अपनी जमीन पर उन्हे खुद भवन निर्माण का अधिकार दिया जाये। इसे लेकर वह मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत व शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक से मिलकर सर्वसम्मत समाधान की मांग करने जा रहे है।

 

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