महामारी को निमंत्रण दे रही शहर में फैली गंदगी

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नगर संवाददाता
देहरादून। उत्तरखण्ड में भाजपा की सरकार आने के बाद जितनी तेजी से स्वच्छता अभियान को चलाने के प्रयास हुए उतनी ही तेजी से शहर भी गंदगी से अटा हुआ दिखाई दे रहा है। शहर में नाला बन चुकी नदियों की बात हो या फिर सड़कों के किनारे पड़ा हुआ कूड़ा। इनका भी अब दून से नाता गहरा होता जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में स्वच्छता अभियान चला कर सफाई का संदेश दिया था। जिसके बाद तमाम राजनैतिक दलों के नेता, कार्यकर्ता भी कहीं न कहीं झाड़ू उठा कर सफाई में जुटे हुए दिखाई देते थे भले ही वहां कूड़ा पड़ा ही नहीं होता था।

प्रदेश में भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण के दूसरे दिन ही कई स्थानों पर सपफाई अभियान चलाया गया। इसके बाद किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। परिणाम शहर में जहां-तहां पफैले कूड़े के ढेर और नाले में तब्दील होती नदियों का कूड़ादान बनना जारी रहा।

आज बिंदाल नदी की बात हो या फिर रिस्पना की। ये दोनों ही नदियां अब सूख चुकी हैं और नाले में परिवर्तित हो गयी है। इन नदियों में या तो बरसात के समय पानी आता है या फिर लोगों के घरों का गंदा पानी और सीवर ही बहता रहता है।

इन नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए छात्रों का एक संगठन लम्बे समय से संघर्ष भी कर रहा है। इसके बावजूद इन नदियों को बचाने के लिए जरूरी कदम न उठाये जाने से सरकार की मंशा पर भी सवाल उठते हैं।

अब इन नदियों में कूड़ा भी फेंका जाने लगा है जिसकी वजह से नदियां नाले के साथ ही कूड़ादान भी बनती जा रही है। वहीं सड़क के किनारे जिस स्थान पर कूड़ा दान रखा जाता है वहां पर लोग कूड़ा डस्टबिन में न डाल कर उसके बाहर ही पफेंक कर चले जाते हैं। यहां तक कि भूमिगत कूड़ेदान होने के बाद भी लोगों को सड़के किनारे गंदगी फेंकनी ही रास आती है।

इस तरह से शहर को क्या पूरे प्रदेश को गंदगी से कभी मुक्ति नहीं मिल सकती है। अब सवाल यह है कि आखिर सरकार और नगर निगम क्या कार्यवाही कर रहे हैं जो शहर में सफाई व्यवस्था पटरी पर ही नहीं आ रही है।

यहां गौर तलब बात यह है कि मंत्रियों और नेताओं के घरों के आसपास तो सफाई व्यवस्था चाक-चौबंद रहती है तो भला उनको कैसे पता चलेगा कि रास्ते किनारे फैली गंदगी किस कदर महामारी को आमंत्रण दे रही है।

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