नशे के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान कितना सफल?

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अपराध् संवाददाता
देहरादून। दून में नशे का कारोबार किस कदर से तेजी पकड़ चुका है इसका अन्दाजा आये दिन नशा तस्करों की गिरफ्तारी से लगाया जा सकता है। नशा तस्कर युवाओं में बढ़ती नशाखोरी का फायदा उठाकर अपने कारोबार को ध्ड़ल्ले से अंजाम दे रहे है। वहीं पुलिस छुटभैय्ये तस्करों को दबोच कर अपनी पीठ थपथपाने से बाज नहीं आ रही है।

दून पुलिस प्रशासन पिछले कई दिनों से नशे के खिलाफ अभियान चला रहा है लेकिन सोचनीय सवाल यह है कि क्या इस अभियान के चलते नशा तस्करी पर अकुंश लग सका है। दून में भारी संख्या में छात्र इस नशे की चपेट में आ चुके है। यह बात हम नहीं पुलिस द्वारा पकड़े गये नशा तस्करों ने कही है। यह नशा तस्कर दून के शिक्षण संस्थानों को अपना निशाना बनाये हुए है।

दून में पकड़े गये छुटभैय्ये नशा तस्करों का कहना है कि वह बिहारीगढ़, सहारनपुर व बरेली आदि जगहों से नशे की खेप लाकर दून सहित पहाड़ी क्षेत्रों में सप्लाई किया करते है।

सूत्रों का तो यहाँ तक कहना है कि नशे के इस काले कारोबार में कई सफेदपोश लोग भी शामिल है। जो छुटभैय्ये नशा तस्करों से इस काम को करवाते है। दून पुलिस आये दिन इन छुटभैय्ये नशा तस्करों को 3 ग्राम , 5 ग्राम, 7 ग्राम स्मैक के साथ दबोच कर वाहवाही लूटने का प्रयास करती है लेकिन वह कभी इस ओर गौर नहीं करती है कि इतने नशा तस्करों के पकड़े जाने के बाद भी राजधनी में नशा तस्करी थम क्यों नहीं रही है।

यह सीधी बात है कि छुटभैय्ये नशा तस्करों को दबोच कर दून में नशा तस्करी थमने वाली नहीं है अगर पुलिस को नशे पर सही मायने में लगाम कसनी है तो वह छुटभैय्ये तस्करों के साथ ही उन सफेदपोशों पर भी हाथ डाले जो सही में इस काले कारोबार की जड़ो में है।

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