क्या पुलिस सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सच मे गंभीर है?

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कोटद्वार। बढ़ती दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रसाशन द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आजकल हैलमेट अभियान चलाया जा रहा है और जगह जगह दो पहिया वाहनों की चेकिंग की जा रही है पुलिस के अनुसार इससे न सिर्फ वाहन दुर्घटनाओ पर लगाम लगेगी बल्कि वाहन चोरी की घटनाओं पर भी लगाम लगेगी। लेकिन पर बड़ा सवाल ये है कि क्या पुलिस सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सच मे गंभीर है या ये सिर्फ महज एक खानापूर्ति कर रही है जिससे लोगो को लगे कि पुलिस वाहन दुर्घटनाओ को लेकर सच मे एक्शन में आ चुकी है। क्योकि जिस तरह कोटद्वार में पुलिस द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट के मानकों को ताक पर रखते हुए खुलेआम ओवरलोडिंग, ओवरहाइट, बिना पंजीकरण, बिना परमिट, बिना फिटनेस के सवारी गाड़ी चलाने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है उससे आम जनता के दिल मे ये सवाल जरूर उठ रहा है कि आखिर नियमों का पालन कराने और सिखाने वाली पुलिस ऐसा क्यों कर रही है। हा ये बात अलग है कि पुलिस प्रसाशन से ये सवाल करने की हिम्मत एक आम आदमी नही कर पाता। लेकिन ये सब देखकर खाकी पर सवालिया निशान जरूर खड़ा किया जाता है। सामान्यत: यदि कोई व्यक्ति स्कूटर या मोटर साइकिल लेकर घर से निकलता है तो ज्यादातर वह नगर या आस पास ही जाता है साथ ही उसे ये भी पता होता है कि उसकी गाड़ी में कितना पेट्रोल है, उसने आखरी बार सर्विस कब कराई थी, वो नशे की हालत में है या नही है और इस बीच यदि किसी कारणवश उसके साथ कोई दुर्घटना होती है तो आस पास आबादी छेत्र होने के कारण उसे तत्काल चिकित्सालय भी ले जाया जा सकता है जहाँ उसके परिजन या मित्र थोड़ी देर में मौके पर आ सकते है।

दूसरी ओर कोटद्वार से पहाड़ी और मैदानी छेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर जीप, टैक्सी,बसें आदि कमर्शियल वाहन चलाने वालों पर पुलिस मेहरबान दिखाई देती है लालबत्ती चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मियों के सामने ही नजीबाबाद-कोटद्वार का जीप स्टैंड पर भेड़ बकरियों की तरह जीप में सवारियां बैठाई जाती है और बाहर लटकी होती है यहा तक कि डिवाइडर पर खड़े होकर और बीच सड़क पर खड़े होकर सवारियों को बुलाया जाता है ये जीपें 2 की०मी आगे जाकर दिन रात कौडिय़ा परिवहन विभाग चैक पोस्ट और पुलिस चैक पोस्ट के सामने से होकर गुजरती है लेकिन दोनों ही विभाग ये देखकर आंखे मूंद कर बैठे रहते है इसका जो भी कारण होगा ये तो वहा बैठे कर्मचारी और अधिकारी ही जाने लेकिन सोचने की बात है जिस गाड़ी में सवार होकर लोग जा रहे है और जंगल और सुनसान जगह से होते हुए लंबा सफर तय कर रहे है क्या उन गाडिय़ों में फर्स्ट एड बॉक्स है, क्या गाडिय़ों की फिटनेस है क्योकि शुत्रों की माने तो कोटद्वार से नजीबाबाद जाने वाली ज्यादातर जीपों का परमिट कोटद्वार के लिए है ही नही और इन गाडिय़ों की हालत इतनी बुरी है कि आये दिन दुर्घटनाये होती रहती है जिस पर पुलिस कहती है मामला कौडिय़ा से आगे यूपी का है इसलिए इसकी जांच करना यूपी पुलिस की जिम्मेदारी है लेकिन पुलिस के सामने ही लालबत्ती चौराहे के साथ ही कौडिय़ा चेकपोस्ट पार कर रहे इन मौत के सौदागरों पर मेहबानी करना उन लोगो की जान के साथ खिलवाड़ नही जिन्हें ये पता ही नही होता कि गाड़ी की स्तिथि ठीक है भी या नही। यही हाल हरिद्वार- देहरादून और पर्वतीय छेत्रो को जाने वाली गाडिय़ों का भी है। सोचने की बात है हैलमेट पर जोर देने वाली पुलिस भी ये जानती है कि दो पहिया वाहन के दुर्घटना ग्रस्त होने से दो या तीन लोगों की जान को खतरा होता है वही सवारी गाड़ी में एक साथ कई सवारियों की जान को खतरा होता है जो कई किलोमीटर लंबा सफर तय कर रहे होते है। कोटद्वार थाने से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1 मई से लेकर अब तक पुलिस द्वारा कुल 2124 वाहनों के चालान किये गए जिसमे 18०4 दो पहिया वाहन,4० तीन पहिया वाहन, और 26०चार पहिया वाहन, 2०ट्रेक्टर ट्रॉली/ट्रक है जिसमे 154 कोर्ट के चालान और 2०9 छोटे बड़े वाहन सीज भी किये गए।

इन आकड़ो से साफ पता चलता है कि कोटद्वार में इतनी सवारी गाडिय़ां मानकों के विपरीत चलने के बाद भी इन पर पुलिस मेहरबान रहती है। (आरएनएस)

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