फेसबुकिया इंद्रजाल से बेहाल

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पूरन सरमा
पहले मेरा फेसबुक एकाउंट नहीं था। सलाहगीरों का आग्रह रहा कि तुझे फेसबुक पर रहना चाहिए, इससे अपने समानधर्मा लेखक मित्रों के व्यूज से परिचित हो सकोगे। मैंने बच्चे से कहा कि भाई मेरा फेसबुक खाता खोल दो और इस तरह मैं फेसबुकिया लेखक हो गया। इससे फायदा यह हुआ कि मैं सृजन से जो संन्यास लेकर गुमनामी में चला गया था, उससे बाहर आने लगा। कुछ फ्रेंड्स रिक्वेस्ट मैंने भेजीं, कुछ आयीं और इस तरह दो साल में कुल 46 ही फेसबुक फ्रेंड्स बन सके। लेकिन इस आंकडे से मैं खुश हूं, क्योंकि वास्तविक जीवन में मेरा एक भी फ्रेंड नहीं है। उसका मूल कारण मेरा अपना रूखा और उपेक्षित व्यवहार ही है, जिससे जो थे, वे भी दूर हो गये।

निजी जीवन में झांकने को छोड़ें और फेसबुक की बात करें। इसी बीच एक घटना से फेसबुक जीवन का मोड़ ही अलग हो गया। एक नामचीन लेखिका की फ्रेंड रिक्वेस्ट आयी तो दिल में खलबली सी मच गई। पर मुझे आश्चर्य इस बात का भी था कि वे काफी सीनियर हैं तथा वे फेसबुक एकाउंट मेनटेन करती हैं। लेकिन उनका फेस फेसबुक पर न होने से सस्पैंस बरकरार था। इधर मैंने उनकी बर्थ डेट भी तलाशी लेकिन वह भी नदारद थी। फिर फेसबुक खाता खुला कैसे?
मैंने एक दिन कमेंट डाला कि बिना डेट ऑफ बर्थ के आपका खाता खुला कैसे? लेकिन जवाब नहीं मिला। फिर दोबारा मैंने फेस अटैच करने की रिक्वेस्ट डाली तो इस बार उनका फेस व डेट ऑफ बर्थ दोनों डाल दी गईं, जिसकी जानकारी से पसीना आ गया। क्योंकि बर्थ ईयर 1925 था और फेस में कुछ नहीं बचा था। न दांत, न मांस, केवल स्कैल्टन।

इस सारे कैलकुलेशन में लेखिका की उम्र 92 साल हो गई थी। मैंने जो खाका बनाया था तथा लाइक्स और कमेंट डाले थे, वे क्षणभर में हवा हो गये। मैंने ऐसी ठण्ड पी कि फेसबुक मैसेज ही पढऩे छोड़ दिये और फेसबुक से तौबा कर ली। बाद में पता चला कि उनका फेसबुक एकाउंट उनका पड़पोता ऑपरेट करता था तथा वही उनको साहित्य में जीवनदान दे रहा था। वह चाहता था कि उनकी परदादी साहित्य में चिरयौवना बनी रहें। इस संबंध में कोई भद्दा कमेंट करूं, इससे पूर्व ही मुझे फेसबुक के 46 लोगों को भी बाय-बाय कर देनी चाहिए? उनसे तो वैसे भी बाय-बाय सी ही थी क्योंकि मुझे उनमें भी कोई रुचि नहीं थी।
बिना फ्रेंड के जी लूंगा तथा शेष जीवन निकाल लूंगा, लेकिन फेसबुक को खोलकर नहीं देखूंगा। अभी वह तो कोई भूल-चूक हुई नहीं। मान लीजिये, कोई कमेंट फालतू का डाल देता तो आजकल सोशल साइट्स के अपराध श्रेणी में पुलिस केस का सामना और करना पड़ जाता। इसलिए हे फेसबुक! तुझे प्रणाम।

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