महंगी मेट्रो

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बुधवार से दिल्ली मेट्रो में सफर करना महंगा हो ग;ा। न्यूनतम किराया आठ रुपये से बढ़ाकर दस रुपये तो अधिकतम किराया 3० रुपये से बढ़ाकर 5० रुपये कर दिया गया है और यह पहले चरण की बढ़ोतरी है। दूसरे चरण की बढ़ोतरी अक्टूबर से लागू होनी है जिसके बाद अधिकतम किराया 6० रुपये हो जाएगा।
मेट्रो सवारी महंगी होने का दिल्ली के आम लोगों पर निश्चित रूप से बुरा असर पडऩे वाला है, खास कर आर्थिक रूप से कमजोर तबकों पर अचानक की गई यह जबर्दस्त बढ़ोतरी बहुत भारी पड़ेगी। लेकिन इस बात पर भी गौर किया जाना चाहिए कि 2००9 से मेट्रो किराये में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। मेट्रो ने राजधानी दिल्ली में परिवहन की स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव किए। कहीं भी आना-जाना पहले के मुकाबले काफी आसान और सुविधाजनक हो गया है। यही वजह है कि अमीर और गरीब हर तबका इसका इस्तेमाल कर रहा है। इस लिहाज से दिल्ली मेट्रो को जबर्दस्त हिट माना जा सकता है। लेकिन क्वॉलिटी सर्विस देकर और दिल्ली वासियों की जिंदगी में अहम स्थान बनाकर भी दिल्ली मेट्रो आर्थिक मोर्चे पर जबर्दस्त चुनौतियों से जूझ रही है। प्रतिदिन करीब 3० लाख लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने वाली दिल्ली मेट्रो को 2०15-16 में 7०० करोड़ से ज्यादा का घाटा हुआ। यह हाल तब है जब बिल्कुल नई व्यवस्था होने के चलते इसकी मेनटेनेंस कॉस्ट बहुत कम है और जापान से लिए गए भारी-भरकम कर्ज की अदायगी अभी शुरुआती चरण में ही है। हमें भूलना नहीं चाहिए कि मेट्रो एक बेहद खर्चीला परिवहन माध्यम है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों में तो फिर भी कोशिश करके इसकी एक ठीक-ठाक अर्थव्यवस्था बनाई जा सकती है लेकिन नागपुर और जयपुर से लेकर गोरखपुर तक में जिस तेजी से मेट्रो लाने की घोषणाएं हो रही हैं उनका बोझ अंतत: किसके सिर पर पडऩे वाला है? इन शहरों में न तो उतने यात्री मिलने हैं, न ही इसके इर्द-गिर्द बड़ी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू होने वाली हैं। बेहतर होगा कि बाद में पछताने के बजाय नए प्रॉजेक्टों का चयन सोच-समझ कर ही किया जाए।(आरएनएस)

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