दून की सफाई व्यवस्था चौपट

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हमारे संवाददाता
देहरादून। राजधानी दून की सड़कों पर लगे कूढ़े के ढेर और कचरे से भरी व बजबजाती नालियों से उठती बदबू प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान को मुंह चिढ़ा रही है।

हाथों में झाडू लेकर सड़कों पर फोटों खिंचवाने में भाजपा नेताओं को शहर की दुर्दशा पर न शर्म आती है और न उन्हे इस गंदगी से जन स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की कोई चिंता फ़िक्र है।

गंदगी की इन तस्वीरों को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजधानी दून की सफाई व्यवस्था कितनी चाक चौबंद है। राजधानी के सबसे पाश इलाकों में गिने जाने वाले राजपुर रोड से लेकर परेड ग्रांउड और तमाम आन्तरिक क्षेत्रों में नालियां कचरे से अटी पड़ी है। नालियों में कूड़ा सड़ने से हवाओं में जहर घुल रहा है वहीं कूड़े का उठान न होने से सड़कों पर गंदगी के ढेर लगे हुए है।

अभी चार दिन पूर्व केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री वैकेया नायडू ने स्वच्छता अभियान के सर्वे की जो रिपोर्ट पेश की थी उसमें टाप टू हंड्रेड में भी सूबे के किसी शहर को स्थान नहीं मिल सका था। राजधानी दून इस सूची में 213वें नम्बर पर आयी थी यह वह दून है जिस पर सूबे के नेता स्वच्छ दून व सुन्दर दून का स्लोगन चस्पा कर फूले नहीं समाते है।

सूबे की इस शर्मनाक स्थिति के उजागर होने के अगले दिन सूबे के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक सड़कों पर नजर आये जिलाधिकारी एसएसपी व नगर अधिकारी रवनीत चीमा के साथ नगर भ्रमण किया उन्हे जगह-जगह साफ सफाई की खामिंया दिखायी और उन्हे व्यवस्थाओं को सुधारने की चेतावनी भी दी लेकिन सवाल यह है कि उनके इस नगर भ्रमण का क्या नतीजा रहा? स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।

गर्मी के इस सड़ांध् भरे मौसम में इस गंदगी का जन स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है यह तो अलग बात है लेकिन असल सवाल यह है कि आने वाले दिनों में बरसात के मौसम में दून का क्या हाल होगा। जब नालियों का यह कचरा दून की खुदी पड़ी सड़कों पर तैरता दिखेगा।

बरसात से पूर्व यदि नगर की जल निकासी व्यवस्था को दुरस्त न किया गया तो आगामी बरसात के मौसम में दून वासियों के लिए बड़ी मुसीबत बनना तय है। बरसात में न तो नाले नालियों की सफाई व्यवस्था संभव है और न सड़कों की मरम्मत का कार्य किया जा सकता है।

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