योगी अनुशरणम् रावत

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भले ही ताजपोशी में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी से आगे रहे हों लेकिन योगी फैसले लेने में रावत से हमेशा आगे रहे है। त्रिवेन्द्र सिंह रावत के बारे में लोगों ने अब यह धारणा बना ली है कि वह यूपी के मुख्यमंत्री के निर्णयों का अनुशरण कर रहे है।

योगी ने उत्तर प्रदेश में गोरक्षा के मद्देनजर अवैध् बूचड़खानों के खिलाफ कार्यवाही की तो उत्तराखण्ड सरकार ने भी बूचड़खानों पर छापेमारी शुरू कर दी। योगी से सरकारी विभागों के अधिकारियों से डेमोस्ट्रेशन लेना शुरू किया तो त्रिवेन्द्र रावत भी अब विभागीय समीक्षा और डेमोस्ट्रेशन शुरू कर रहे है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने महापुरूषों के जन्म दिन पर होने वाली दर्जन भर से अधिक छुट्टियां समाप्त करने की घोषणा की तो अब उत्तराखण्ड में महापुरूषों की जयंती पर होने वाली छुट्टयों को समाप्त करने का फैसला ले लिया गया।

योगी जिस तरह सरकारी विभागों व सचिवालय कार्यालयों का निरीक्षण करते रहे है और अधिकारियों पर लगाम लगा रहे है त्रिवेन्द्र रावत भी अब कुछ वैसे ही प्रयास करते दिख रहे है। हालांकि इस बात में कोई बुराई नहीं है अगर आप किसी को अच्छा करते हुए देखते है और उसका अनुशरण करते है। लेकिन एक कहावत है कि नकल के लिए भी अक्ल चाहिए। अगर त्रिवेन्द्र रावत के पास योगी जैसी दृढ़ इच्छा शक्ति है और वह उनकी तरह कुशल प्रशासक है तो निश्चित रूप से इसका राज्य को फायदा होगा।

दुखद यह है कि सूबे के अधिकारी उन्हे उतनी गम्भीरता से नहीं ले रहे है। उत्तर प्रदेश के अधिकारी योगी से इस हद तक खौफजदा है कि वह रात के एक व दो बजे तक सचिवालय में बैठने पर विवश है वहीं उत्तराखण्ड के अधिकारी समय से आने जाने तक को तैयार नहीं है।

रावत अगर योगी की तरह उन्हे काम करने पर विवश नहीं कर सकते है तो उनके योगी अनुशरणम् का कोई फायदा होने वाला नहीं है।

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