खनन का काला कारोबार

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उत्तराखण्ड में कितने व्यापक स्तर पर अवैध् खनन का काला कारोबार निर्वाध् रूप से जारी है इसका एक प्रमाण बीते कल लाल तप्पड़ में एएसपी लोकेश्वर सिंह द्वारा अवैध् खनन सामग्री से लदे 68 डम्परों को सीज किया जाना है। इस पूरे प्रकरण में दो बातें साफ है पहली है पुलिस का संरक्षण।

भले ही कोई पुलिस अधिकारी या कर्मी इससे इंकार करे लेकिन कल जो 68 डम्पर सीज किये गये वह सभी लालतप्पड़ चौकी केे सामने से आ रहे थे इससे साफ है कि चौकी इंचार्ज व अन्य सभी पुलिस कर्मियों की मिली भगत से ही इतने व्यापक स्तर पर यह खनन का खेल चल रहा था। एसएसपी को इसकी शिकायतें लम्बे समय से मिल रही थी और उन्ही के आदेश पर यह कार्यवाही की गयी। अब चौकी इंचार्ज को सस्पेंड कर दिया गया है।

दूसरी मुख्य बात यह है कि यह सीएम त्रिवेन्द्र रावत के डोईवाला क्षेत्र का मामला है तथा यह राजधानी के बिलकुल नजदीक है। जब शासन-प्रशासन की नाक के नीचे इतने व्यापक स्तर पर यह काला कारोबार चल रहा है तो बाकी प्रदेश के हालात क्या होगें? इसका अंदाजा भी सहज लगाया जा सकता है। अभी बीते दिनों नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा अवैध् खनन के मुद्दे पर राज्य में खनन पर पूर्ण प्रतिबन्ध् लगा दिया गया था जिसे लेकर राज्य सरकार भी बेचैन दिखी थी। लेकिन सवाल यह है कि इस अवैध् खनन को रोकने की जिम्मवारी भी तो शासन प्रशासन की ही है।

इस खेल का सच यही है कि राज्य के नेता,अधिकारी, पुलिस खनन माफिया के साथ मिले हुए है और सभी इस काले कारोबार से मोटी कमाई कर रहे है। यह अलग बात है कि इससे सरकार को सिर्फ एक चौथाई ही मिल पा रहा है बाकी तीन चौथाई माफिया व पुलिस व नेता संरक्षण के नाम पर डकार रहे है।

वर्तमान सरकार क्या करती है अलग बात है।

अब तक की सभी सरकारों के कार्यकाल में तो यही होता रहा है।

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