आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में धांधली का आरोप

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नगर संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड महिला मंच ने दून जनपद में राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में हुई धांधली की सीबीआई/ न्यायिक जांच की मांग व वास्तविक आंदोलनकारियों की अनदेखी पर रोष जताते हुए जिला मुख्यालय में धरना दिया।

महिला मंच की कार्यकत्रियों का कहना था कि उत्तरखण्ड राज्य आंदेालनकारियों के चिन्हीकरण में धांधली चल रही है। राज्य आंदेालन के अंतर्गत आंदोलनकारियों के तमाम संघर्षों ओर बलिदानों के बाद यह राज्य मिला है।

राज्य बनने के बाद शासन ने आंदोलनकारियों के बलिदानों को समझते हुए उन्हें पुरस्कार/अनुदान स्वरूप किसी न किसी रूप में पेंशन, नौकरियां आदि प्रदान करने की घोषणा की। उनका कहना था कि इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि प्रशासन ने चिन्हीकरण के तहत बहुत से वास्तविक आंदोलनकारियों को उनका वाजिब हक दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पर इसी के साथ चिन्हीकरण के मुद्दे पर कई ऐसे लोगों का भी चिन्हीकरण हो गया जो आंदोलन में शामिल ही नहीं हुए।

तमाम फर्जीवाड़े के बीच नकली आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण हो गया। जो अब सरकारी अनुदानों का लाभ उठा रहे हैं। जबकि असली आंदोलनकारी आज भी अपना चिन्हीकरण करवाने के लिए एडि़यां रगड़ रहे हैं। यह सब धांधली कैसे हुई यह जांच का विषय है। उनका कहना था कि ऐसे फर्जीवाड़े व भ्रष्टाचार को रोकने के लिए सीबीआई जांच/ न्यायिक जांच के लिए निर्देशित किया जाये जिससे प्रदेश के वास्तविक आंदेालनकारियों को उनका हक मिल सके।

धरने में निर्मला बिष्ट, शकुलंता गुसाईं, मातेश्वरी सजवाण, जसवंती बिष्ट, बिना सकलानी, कौशल्या चौहान, साकम्बरी , पदमा गुप्ता, उषा भट्ट, भारती नेगी तथा हेमलता नेगी आदि शामिल थीं।

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